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सोमवार, 24 जून 2019
नीशेप क्लीनिक में नाभी को आकृषक बनाना
सैक्सी
नाभी
आज के इस
फैशनपरास्ती युग में महिलाओं की नाभी का गहरा आकृषक होना बहुत आवश्यक है क्योकि
आज के इस फैशन के दौर में प्राय: सभी महिलाये नाभी र्दशना वस्त्र अधिक पहनती है ,
ताकि उनकी नाभी का प्रर्दशन हो सके, वैसे भी नाभी महिलाओं का एक सैक्सी अंग ऐसा
है जिसका प्रर्दशन आसानी से किया जा सकता है यह किसी अश्लीलता की परिधि में भी
नही आता सम्पूर्ण मर्यादाओं में रहते हुऐ भी महिलाये अपने आकृषक शरीर के उतार
चढाओं को एंव सैक्सी कुछ अंगों का प्रर्दशन पूर्ण मयार्दा की सीमा में रहते हुऐ
भी कर सकती है , और यह आज की मांग भी है यदि आप स्टाईलेस नही है तो आप को सामान्य
भाषा में बहनजी जैसे शब्दों के सम्बोधन से गुजरना पड सकता है । जैसे साडी पहनने
की कला कुछ लोगो में नही होती इससे कुछ महिलाये प्राय: साडी को नाभी से ऊपर पहनती
है इससे एक तो पेट जहॉ पर वे सांडी को बांधती है वहा पर पेट का कुछ भाग ऊभार लिये
होने से पेट बडा दिखने लगता है फिर नाभी जैसी सैक्सी अंग का प्रर्दशन नही होता
कमर का अधिकाशं भाग साडी पहनने के गलत तरीके से छिप जाता है वही कुल्हे के उतार
चढाव का पूर्ण प्रर्दशन नही हो पाता । चलो यह तो साडी की बात हुई परन्तु हम यहॉ
पर सैक्सी नाभी की बात कर रहे है । सैक्सी नाभी याने पूर्णरूप से गहरी गोल नाभी
एंव पेट पर नाभी बल का बना है । आज के इस युग में सैक्सी नाभी का इतना अधिक महत्व
है कि यह सामान्य व्यक्तियों से लेकर फिल्मी दुनिया एंव टी वी सीरियल सभी में
इस देखा जा सकता है । अब प्रश्न यह है कि सैक्सी नाभी क्या है तो जैसा हमने
पहले कहॉ है सैक्सी नाभी याने पूर्ण रूप से गहरी एंव गोल नाभी ही सैक्सी नाभी
होती है कुछ महिलाओं की नाभी कम गहरी, सकरी,या किसी जख्म के निशान की तरह होती है
इतना ही नही कुछ महिलाओं की नाभी तो डण्टल की तरह से बाहर को निकली हुई होती है ,
कुछ नाभीयॉ गहरी तो होती है परन्तु उनमें धारीयों की संख्या अधिक होने से नाभी
की गहराई पूर्णरूप से नही दिखती एंव नाभी धारीयॉ दिखने से नाभी के अंदर की धारीयॉ
मटमैले या काले रंग की दिखती है इससे नाभी का आकृषण जाता रहता है । कई महिलाओं की
नाभी गहरी तो होती है परन्तु उसमें नाभी धारीयों की जगह नाभी पर कुछ मसल्स नुमा
पटटीया या धारीयों की तरह से मासल्स ऊभरे होते है इससे नाभी की गहराई स्पष्ट
नही दिखती व नाभी आकृषण जाता रहता है । इन सभी समस्याओं का उपचार नीशेप क्लीनिक
में बिना किसी चीडफाड के नेवल स्प्रिग व नेवल कार्क से आसानी से किया जा सकता है ।
नेवल स्प्रिंग एक साधारण स्टीललैस स्टील की नाभी के आकार की गोल स्पिंग होती है
इसे सकरी नाभी या ऐसी नाभी जिनमें धारीयॉ या अनावश्यक मसल्स की लाईने स्पष्ट दिखलाई देती हो उन्हे छिपाने व स्थाई
रूप से ठीक करने हेतु नेवल स्प्रिंग का उपयोग किया जाता है । नेवल स्प्रिंग को
सकरी नाभी या जिस नाभी को गहरी गोल करना हो नाभी के अन्दर डाल कर छोड दिया जाता
है इससे स्प्रिंग अपने स्वाभाव के अनुसार नाभी के अन्दर जाते ही फैल जाती है एंव
नाभी के आकार को पहले की अपेक्षा कुछ बडा कर देती है नेवेल स्पिंग चूंकि स्टील का
एक पतला तार होता है जो नाभी के अन्दर जाते ही नाभी के अन्दर की मसल्स को दबाता
है इससे एक तो तार मसल्स में इस प्रकार से दब जाता है कि दिखलाई ही नही देता
दुसरा नाभी को गोलाकार में फैला देता है इस नाभी स्पिंग को आसानी से नाभी पर लगाया
जा सकता है एंव इसे आसानी से निकाला जा सकता है । इसका प्रयोग भी दो प्रकार से
होता है एक स्थाई जिसमें स्थाई रूप से इसे नाभी के अंदर लगा रहने दिया जाता है
दूसरा अस्थाई रूप से इसमें कभी कभी महिलाये जिनकी नाभी सकरी व छोटी है या नाभी पर
नाभी धारीयॉ दिखती है उन्हे छिपाने के लिये जब किसी फंग्शन ,पार्टी आदि में जाना
होता है तब लगाती है एंव घर पर आकर उसे निकाल लेती है । इसके लगाने से नाभी पूर्ण
गोलाकर गहरी सुन्दर दिखने लगती है । दूसरी विधि है नेवल कार्क इसमें नाभी पर एक
कार्क जो नाभी के आकार से थोडा सा बडा होता है उसे नियमित रूप से लगा कर नाभी के
आकार को बढाया जाता है । नाभी को गहरा
आकृषक सैक्सी बनाने की नेशेप क्लीनिक की सम्पूर्ण जानकारीयॉ व इसके नि:शुल्क
प्रशिक्षण की जानकारीयॉ निम्न साईड पर उपलब्ध है । आप नेवल स्पिंग गुगल की साईड
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डॉ0 जीनत खान (नीशेप
विशेषज्ञ)
राझी
जबलपुर मध्यप्रदेश
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गुरुवार, 31 जनवरी 2019
नाभी की बनावट (हिलमोजी साईस)-2
नाभी की बनावट (हिलमोजी साईस)
हिलमोंजी सांइस :- इसमें सर्वप्रथम नाभी की बनावट उसके विभिन्न्ा
प्रकारों का अध्ययन किया जाता है तत्पश्चात शरीरि के अंतरिक अंगों के रोगग्रस्त
होने पर नाभी की बनावट तथा उसकी धारीयों में जो परिवर्तन होते है उसका पता लगाया
जाता है । शरीरिक रस रसायनों में जो परिवर्तन होते है जैसे शरीर का पी एच लेबिल की
असमानता हो या हार्मोन्स की असमानता आदि ।
नाभी के प्रकार :- मोटेतौर पर हम नाभी को मुख्यत: नाभी तीन प्रकारों में
विभाजित कर सकते है ।
1-सतही नाभी जो पेट पर न तो गहरी होती है न ही उठी हुई इसे सतही नाभी
कहते है
2-डण्टल की तरह ऊपर को उठी हुई नाभी
3-गहरी नाभी जो पेट के ऊपरी मसल्स से नीचे गढढे की तरह से होती है ।
विद्वानों के मतानुसार प्रमुखरूप से निम्ना प्रकार की नाभी पाई जाती
है ।
Ridge रिजिस –रिजिस या धारीयॉ जो शरीर में प्राय: हाथ
पैरों पर पाई जाती है परन्तु यह शरीर के अन्य भागों में भी पाई जाती है । जिस
प्रकार किसी भी मनुष्य के हाथ की धारीयॉ एक दूसरे से नही मिलती ठीक उसी प्रकार
नाभी धारीयॉ भी किसी भी व्यक्यों में एक सी नही होती । ऊपर की तरफ यदि रिजिस या
धारी स्पष्ट दिखलाई दे तो समक्षे इस प्रकार के मरीज को मानसिक बीमारी हो सकती है
। यदि यही धारी नाभी मध्य से निकल कर ऊपर की तरफ पेट पर पाये जाने वाले जिस
अंतरिक अंग को टारगेट करे तो समक्षे उस मरीज को उसी अंतरिक अंग से सम्बन्धित
बीमारी होगी सभी नाभी धारीयों में या नाभी पर पाये जाने वाले रंगों का परिक्षण करना अवश्यक है
Helum हिलम – याने गढठा
या छिद्र इसे hilus भी कहते है यह नाभी
कम गहरी होती है परन्तु इसमें स्पष्ट रूप से धारीयॉ देखी जाती है जो नाभी मध्य
से होती हुई नाभी वृत पर किसी एक छोर की तरफ निकलती है प्राय: इस प्रकार की नाभी
की धारीयॉ शरीर के जिस ओर निकलती है उससे शरीर के कुछ आवश्यक अंगों को रोग पहचान
हेतु टारगेट किया जाता है जैसे नाभी के मध्य से एक स्पष्ट धारी निकल कर सीधे
ऊपर की तरफ के नाभी वृत के बीचों बीच निकली है तो इससे चिकित्सक को सर्वप्रथम
हिदय फिर मस्तिष्क को टारगेट करना चाहिये । इसी
प्रकार से यदि नाभी धारी एक ना होकर तीन है जैसे एक नाभी वृत के ऊपर की तरफ है तथा
दो एक दाहनी ओर तथा एक बॉयी ओर है । इस प्रकार की धारीयों से रोग निदान के पूर्व
आप को देखना होगा कि जो नाभी धारी गहरी एंव स्पष्ट है रोगी उसी तरफ के अंगों से
सम्बन्धित बीमारीयॉ है तथा जो धारीयॉ जितनी कम गहरी व अस्पिष्ट है इसका अर्थ है
अभी तो रोगी को कोई रोग नही है या जिस अंतरिक अंग की तरफ नाभी धारी का संकेत है वह
रोग या तो कम है या भविष्य में हो सकता है
Helix हिलेक्स – इसकी बनावट पेचदार या धुमती हुई आकृति की होती है । Apex शीर्ष – अपेक्स की बनावट नोक
के समान या शीर्ष की तरह से उठी हुई होती है । इस तरह की नाभी डण्टल की तरह ऊपर को निकली हुई होती है । इसके
रोगी को प्राय: नाभी धारीयों की तरह से धुमती हुई बीमारीयॉ होती है अर्थात कभी एक
बीमारी होगी तो कभी दुसरी बीमारी होगी प्राय: इस प्रकार की धारीयों वाले मरीज कई
बीमारीयों की चपेट में आते रहते है
Umbo गाठ – यह प्राय: गाठों की तरह की अकृति की होती है । इस प्रकार की नाभी गहरी न
हो कर उपर निकली हुई गाठ की तरह से दिखती है । एंव इस प्रकार की नाभी वाले व्यक्तियों
को प्राय: गैस की बीमारीयॉ अधिक होती है । इसमें भी आप नाभी धारीयों की स्थिति
उसकी बनावट रंग आदि का परिक्षण करना चाहिये ।
Nodeगाठ – यह भी Umbo की तरह फूला हुआ भाग होता है । यह हार्निया ग्रस्त व्यक्तियों में या
फिर गरीब तपके के लोगों में पाई जाती है इन्हे प्राय: गैस की शिकायते अधिक होती
है इसनी विचारधारये संकीर्ण हुआ करती है । इस पर भी धारीयॉ पाई जाती है इसका
बारीकी से अध्ययन करना आवश्यक है ।
Arch धूमती हुई आकृति – शरीर का कोई
भी गाठ या छेद्र प्राय: जो धुमाव लिये हुऐ आकृति का होता है उसे आर्च कहते है । इस
प्रकार की धारीयों या बनावट पूरी Helix हिलेक्स से मिलती है ।
Deep डीप या गहराई – ऐसी
नाभी जो किसी गडडे की तरह से गहरी होती है उसे डीप या गहरी नाभी कहते है । इस
प्रकार की नाभी का परिक्षण बडी बारीकी से करना चाहिये क्योकि इस प्रकार की नाभी
में भी धारीयॉ पाई जाती है साथ ही धारीयों के साथ कुछ परिवर्तन भी देखे जाते है
उनमें नाभी के अन्दर छोटे बारीक निशान या नाभी मध्य सतह पर रंग परिवर्तन भी देखा
जाता है । रंग परिवर्तन से भी बीमारीयों की स्थिति रस रसायन में परिवर्तन का पता
लगाया जाता है । इस प्रकार की नाभी में कभी कभी नाभी धारीयॉ नाभी मध्य से निकल कर
नाभी वृत तक या तो जाती है या कुछ लोगों में केवल नाभी के मध्य में ही देखी जाती
है इसका बारीकी से अध्ययन करे एंव जिस ओर नाभी धारी की स्थिति हो उसी तरफ के
शारीरिक या अंतरिक अंगों को टारगेट करना चाहिये ।
आई
शेप( ऑखों की आकृति ):- इस प्रकार की नाभी अधिक गहरी नही होती
परन्तु इसकी आकृति को ध्यान से देखने पर ऐसा लगता है जैसे ऑखों का आकार हो । इस
प्रकार ऑखों की अकृति वाली नाभी भी दो प्रकार की होती है । एक में ऑखों के आकार के
अन्दर धारीयॉ स्पष्ट रूप से दिखलाई देती है तो दूसरे प्रकार की नाभी में धारीयॉ
नही दिखती इस प्रकार की नाभी गहरी होती है । इसका परिक्षण भी नाभी धारीयों की स्थिति एंव रंग
परिवर्तन आदि को देख कर करना चाहिये ।
गुरुवार, 6 दिसंबर 2018
नाभी सुखानुभूति उपचार
नाभी सुखानुभूति उपचार

सुखानुभूति उपचार से मानसिक रोगों का उपचार :- चीन व जापान एंव अब तो यह कहने में किसी
प्रकार का संकोच नही है कि संमृद्धशाली राष्ट्रों में सुखानुभूति उपचार ने अपने
सफलता के झंडे गांणने शुरू कर दिये है । सुख के अनुभव से कई प्रकार के मानसिक
रोगों का उपचार किया जा सकता है , जिसमें पागलपन, हिस्टीरिया, मिरगी, तनाव, हत्या,या
आत्महत्या का विचार, फोबिया ,आदि से लेकर अब तो शारीरिक बीमारीयों का उपचार भी
किया जाने लगा है एंव इसके आशानुरूप परिणाम भी सामने आ रहे है । सुख के अनुभव से
हमारे शरीर में सेरोटोनिन एंव डोपामाइन हार्मोस सक्रिय होते है, इससे हमारे शरीर
की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है । अब सवाल उठता है कि सुखानुभूति
उपचार कैसे किया जाये । मनोवैज्ञानिकों ने पाया कि हमारे शरीर की छोटी से छोटी
कोशिकाओं में सुख की अनुभूति को ग्रहण करने की क्षमता है ,इस ग्रहण किये जाने वाली
अनुभूति को वह मस्तिक को भेजता है । जिससे भावनात्मक हार्मोंस सेरोटोनिन एंव
डोपामाइन सक्रिय हो जाते है । इस उपचार प्रक्रिया में शरीर के सबसे संवेदन शील
हिस्से को सहलाया जाता है जिसमें प्रमुख रूप से नाभी है क्योकि नाभी में 72000
नाडीयों का केन्द्रक पाया जाता है । इस छोटी सी नाभी को सहलान के लिये किसी बारीक
बस्तु का प्रयोग किया जाता है एंव पूरे पेट पर पक्षियो के पंख से सहलाया जाता
है । जापान व चीन में पक्षियों के पंख एंव
पेंसिल जैसी नुकीली वस्तु को धीरे धीर महिन स्पर्श कराया जाता है तथा रोगी को ऑख
बन्द कर सोने का आदेश दिया जाता है रोगी नाभी के अन्दर हो रहे स्पर्श की
संवेदना को महशूस करता है एंव उसे सुख की अनुभूति होती है भावनात्मक हार्मोस के
सक्रिय होते ही वह आनन्द में खोता चला जाता है । मानसिक रोगीयों में जो मानसिकता
उसके मस्तिष्क में स्टोर होती है (जिसकी वजह से वह मानसिक रोग का शिकार हुआ है)
वह इस सुखानुभूति की वजह से धीरे धीरे लुप्त होने लगती है । इस आनन्द की अनुभूति
पुराने स्टोर को खत्म कर देती है एंव नई इस आनन्द की अनुभूति उसके मस्तिष्क
में स्टोर हो जाती है, इससे उसके शरीर मे एक तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ जाती है
। वह इस उपचार के बाद अपने आप को स्फूर्तिवान , तरोताजा महसूस करने लगता है ।
पहले उसे जो शिकायेते थी जैसे तनाव ,भूख न लगना ,चिडचिडापन , किसी भी प्रकार का डर
, हिस्टीरिया ,मिर्गी ,पागलपन ,हत्या या आत्महत्या का विचार , कामचोरी की
प्रवृति , याददास्त का कम होना ,आदि में इस उपचार से काफी लाभ होता है ।
मानसिक बीमारीयॉ ही नही बल्की शारीरिक कई प्रकार की
बीमारीयों में इसके बडे ही अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे है । इस उपचार को नाभी
संवेदना उपचार भी कहॉ जाता है ।
नाभी जड से सौन्द्धर्य समस्याओं का निदान :- नाभी पर पाई जाने वाली जड से समस्त प्रकार के सौन्द्धर्य समस्याओं का उपचार सफलता पूर्वक बिना किसी दवा दारू के किया जा रहा है । और इसके बडे ही अच्छे एंव सुखद परिणाम भी सामने आ रहे है । नाभी की जड
याने नाभी के अन्दर गहराई में परिक्षण करने पर एक नलिका का आभास होता है यही है
नाभी जड ।
नाभी जड का
परिक्षण:- नाभी जड, नाभी के अन्दर पाई जाती है, इसकी पहचान इस प्रकार से करते है,
जिसकी नाभी की जड का परिक्षण करना हो उसे सीधा स्टूल पर बैठा दे इसके बाद नाभी से
ऊपर अपने दाहने हाथ को इस प्रकार रखे की चारों अंगूलिया नाभी से दो या तीन इंच की
दुरी पर हो एंव अंगूठा नाभी के नीचे दो या तीन इंच की दूरी पर हो अब अपनी हथेली को
प्रेशर देने हुऐ इस प्रकार दबाये कि नाभी अंगुलियों के बीच में रहे एंव आप के पंचे
नाभी के नीचे बाली जगह को इस प्रकार से दबाये जिससे आप की अंगुली और अंगूठा जिस स्थान
पर मिलेगा वहॉ पर दबाने पर आप को किसी ऐसी वस्तु का आभास होगा जैसा कि वह स्थान
नाभी से जुडी हुई है इसे ही नाभी जड कहते है ।
चीन ,जापान
, मिस्त्र ,मियामी एंव ऐसे कुछ राष्ट्र या जहॉ सौन्द्धर्य ही सब कुछ है , वहॉ
विशेषकर युवा महिलाओं में सौन्द्धर्य समस्याओं का उपचार नाभि जड से ही किया
जाता है और यह उपचार बडे बडे मिसाज पार्लर
या ब्युटी क्लीनिक या नीशेप क्लीनिक ,ची नी शॉग क्लीनिक के साथ बडे बडे फाईव
स्टार होटलों में उपलब्ध है । इसके बडे ही आश्चर्यजनक आशानुरूप परिणामों ने इसे
खॉस कर महिलाओं को इस उपचार की तरफ आकृषित किया है । चूंकि महिलाओं में सौन्द्धर्य
के प्रति विशेष आकृषण होता है । महिलाओं
में कई प्रकार की समस्यायें होती है, जिससे उनका सौर्न्दय नष्ट ही नही हो जाता,
बल्की वे एक हीन भावना का शिकार भी हो जाती है । जैसे एक निश्चित उम्र के बाद यदि
स्त्रीयों के स्त्रीसुलभ अंगों का विकाश न हो तो आप कल्पना करे कि वह महिला
कैसी दिखेगी । इसे थोडा सा और स्पष्ट करने की आवश्यकता है स्त्री सुलभ अंग से
तात्पर्य उसके ऐसे अंग जो उसे पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान करे , शरीर के आकार
प्रकार उसके उतार चढाव आदि जैसे स्तन एंव कूल्हे का उम्र के हिसाब पूर्ण विकसित
होना कमर पतली पेट मसल्स युक्त झील की तरह से जिसमें गहरी आकृषक नाभी हो जो किसी
भॅवर कि तरह से दिखे । रंग गोरा ऑखों में चमक घने लम्बे बाल एक स्त्री को पूर्ण
यौवन (कामनीयता जिसे सैक्सी , या हॉट कहते है) प्रदान करते है ।
सौन्द्धर्य सम्बधित समस्याओं का निदान नाभी चिकित्सा से :-सौन्द्धर्य सम्बधित बहुत सी समस्याओं का उपचार नाभी जड एंव
नाभी चिकित्सा से बिना किसी बडे परिक्षणों एंव दवा दारू के घर पर ही किया जा सकता
है । आवश्यकता है नाभी चिकित्सा को समक्षने की जो इसके अध्ययन से आसानी से
समक्षा जा सकता है कुछ तकनीकी समस्याये यदि है तो उसका निदान इस चिकित्सा के
ज्ञाता से प्रेक्टिकल अभ्यास लिया जा सकता है वैसे इसके आडियों वीडियों नेट पर
उपलब्ध है एंव हमारे प्राय:प्राय: प्रत्येक लेखों के साथ इनके जानकारीयों की
साईड दी होती है उससे भी आप जानकारीयॉ हॉसिल कर सकते है ।
1- त्वचा मुलायम चमकदार गोरी बनाने के लिये :- त्वचा को गोरी मुलायम स्निग्ध बनाने की कई विधियॉ प्रचलन में है एंव इसके
बडे ही अच्छे परिणाम में सामने आये है । परन्तु यहॉ पर नाभी चिकित्सा के उपचार
की चर्चा चल रही है इसलिये हम इसी विषय पर चर्चा करते है त्वचा को मुलायम चमकदार
गोरी बनाने के लिये सुखानुभूति उपचार लिया जा सकता है इससे आप के त्वचा के सैल्स
एंव संसूचना प्रणाली के साथ आप की प्रतिरोधक क्षमता बढेगी प्रिरेडिकल्स एंव मृत
कोशिकायें झड जाती है उनकी जगह पर नई
कोशिकायें बनने लगती है मन प्रसन्न एंव
तनाव कम होता , शरीर के रस रसायन संतुलित होने लगते है ।
(अ)
बायवेटर से मिसाज लेना :- बायवेटर मशीन से पेट का मिसाज करना चाहिये यह मिसाज नाभी
के चारो ओर गोल धुमाते हुऐ करते जाये एंव नाभी पर पॉच छै: मिनट बायवेटर मशीन को
रोके इससे आप की ऑतों के मिसाज होने से रस रसायन का संतुलन तो ठीक होता ही है साथ
ही आप के पेट पर शरीर के समस्त आंतरिक महत्वपूर्ण अंग होते है ,कई अंग जिनमें
शामिल है संसूचना तंत्र जो कभी कभी सुसप्तावस्था में आने से निष्क्रिय हो जाते
है । इस मिसाज से वे पुन: सक्रिय हो जाते है । इससे पाचन तंत्र तथा शरीर के अन्य
आंतरिक अंग अपना कार्य सुचारू रूप से करने लगते है । इसका प्रभाव त्वचा व हमारे
प्रत्येक सैल्क पर होता है ।
अम्ल एंव
क्षार का पी एच-7 होने पर शारीर का रसायनिक संतुलन सही होता है ,पीएच-7 से अधिक
होने पर क्षारीय एंव कम होने पर अम्बली होता है । अम्बलीयता के बढने पर त्वचा खुरदरी एंव रंग सावला होना शुरू हो जाता है
। अम्ल व क्षार की अधिकता या कमी का
परिणाम शारीरिक रसायनिक घटकों में असमानता उत्पन्न तो करती ही है साथ ही अम्बली
या क्षारीय माध्यमों में होने वाले वेक्टेरियाजनित बीमारीयों की संभावनाये बढ
जाती है । क्षय रोग फेफडों के रोग व कैसर त्वचा खुरदरी
उस पर दॉग धब्बे मुंहासे ब्लैक हैड त्वचा का रग काला होना जैसी
बीमारीयों में शारीर में अम्ल का स्तर बढ जाता है ।
अम्लीयता क्षारीयता का परिक्षण :- नाभी मे जो
गंध होती है अम्बलीय या खटटी ,इसके मैल की परत को निकाल कर उसे साफ पानी में
घोलकर लिटमस पेपर पर डालने पर लिटमस पेपर का रंग नीला हो जाता है तो समक्षिये की आप का पी0 एच0 अम्बलीय है ।
क्षार के स्तर के अधिक बढने पर कडुवी सी गंध आती है तथा इसकी परत का परिक्षण
करने पर लिटमस पेपर लाल हो जाता है ।
जानकार नाभी
चिकित्सक नाभी पर पाये जाने वाले इस मैल का परिक्षण विभिन्न विधियों से कर
बीमारी का पता आसानी से लगा लेते है ।
जैसे यदि नाभी धारी के मध्य पीला रंग है तो उसे पित्त से सम्बन्धित
बीमारीयॉ या फिर पीलियॉ जैसा रोग होगा , ठीक इसी प्रकार यदि नाभी धारीयों का रंग
अत्यन्त लाल है तो उसे रक्त विकार की शिकायत हो सकती है । नाभी धारीयों के मध्य
सफेद रग का होना वात रोग या नसों से सम्बन्धित बीमारीयों का दृशाता है । नाभी में
खटटी गंध आने पर रोगी अपच तथा अम्ल्ा रोग का शिकार होता है ।
विधि :-
सर्वप्रथम पूरी त्वचा को स्प्रिट या अलकोहल के कॉर्टन से अच्छी तरह से साफ करे
जैसे ही आप स्प्रिट या अलकोहल को त्वचा पर लगाते है आप की त्वचा एकदम ठंडी हो
जायेगी एंव अलकोहल या स्प्रिट मृत कोशिकाओं को बाहर निकालने के लिये उत्तेजित
करता है । इसके बाद यदि आप का पी0एच0 अम्बलीय है तो एक निब्बू के रस में खाने के
सोडा लगभग एक चम्मच मिला कर उसे अच्छी तरह से घोल ले इसके बाद उसे हथेलीयों से
पूरे शरीर में लगा कर छोड दीजिये । यदि आप का शरीर क्षारीय है तो आप खाने के सोडा
का उपयोग न करे । इसे थोडी देर तक लगा रहने दे इसके बाद इसे पानी से धोकर इस
प्रकार से निकाले ताकि खाने का सोडा पूरी तरह से साफ हो जाये । अब अन्तिम चरण में
आप शुद्ध ग्लीसरीन को पूरी त्वचा पर
लगाना है । इसे भी थोडी देर के लिये लगा कर छोड दीजिये , इसके बाद आप गुलाब जल में
थोडी सी हल्दी को मिलाकर उसका पेस्ट बनाये इस
पेस्ट में यह ध्यान रखे कि यह गीला अधिक होना चाहिये फिर इसे हथेली पर
लेकर जहॉ जहॉ ग्लीसरीन लगाया था इस प्रकार से लगाते हुऐ धीरे धारे रगडते जाये इस
प्रकार के रगडने से आप के शरीर से मैल की परते निकलती जायेगी । मृत्ा कोशिकाये
निकलने से नयी कोशिकाओं को बनने के लिये रास्ता साफ हो जायेगा ।
इसे उपचार
को आप ने मात्र तीन चार बार ही कर लिया तो आप स्वयम देख कर हैरान रह जायेगी कि आप
की त्वचा मुलायम स्निग्ध चमकदार हो गयी है ।
अब गोरी त्वचा
के लिये आप को ग्लीसरीन में बर्बेरिस अक्वाफोलियम दोनो बराबर मात्रा में मिला कर
उपयोग करना है । या आप रात्री में पूरे शरीर में बर्बेरिस अक्वाफोलियम को पानी
में मिला कर या ऐसे ही लगा सकती है साथ ही आप को नाभी में इसकी दो चार बूंदे इस
प्रकार से लगाना है ताकि नाभी में यह दवा लम्बे समय तक बनी रहे इसलिये किसी
कॉर्टन को भिगो कर भी इसका उपयोग कर सकते है । इसके कुछ दिनों को प्रयोग से आप देखेगे
कि आप की त्वचा गोरी स्निग्ध मुलायम चमकदार हो जाती है ।
आवश्यक
सूचना
सौन्द्धर्य समस्याओं की जानकारी ,एंव नाभी चिकित्सा से सौन्द्धर्य
उपचार की जानकारी हेतु आप इन साईड पर विजिट करे । इन साईड पर नि:शुल्क बहुत से कोर्स
संचालित है । जिनमें प्रमुख रूप से नाभी चिकित्सा , ब्युटी क्लीनिक ,नीशेप क्लीनिक,
ची नी शॉग उपचार , नेवल एक्युपंचर , कपिंग उपचार , पिर्यसिंग ,टैटू आर्ट, ब्यूटी
पार्लर, सभी कोर्स ईमेल से होते है । प्रेक्टिकल वीडियो या फिर नगर में आसपास कही भी
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