रविवार, 12 अगस्त 2018

Anubhaw


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  इस कालम के अर्न्‍तगत हम इस पैथी के उपचारो  के अनुभवों ,मरीजों व छात्रों के प्रयोगिक अनुभवों को शेयर करेगे ताकि छात्रों के साथ अन्‍य मरीजों को इसकी जानकारीयॉ हो सके । आप सभी से निवेदन है कि आप अपने उपचार व अनुभवों की जानकारी अपने पास पोर्ट साईज के फोटोंग्राफ के साथ समय समय पर भेजते रहे । हम अपने ब्‍लांग पर एंव छात्रों की पाठय सामग्री के साथ इसे समय समय पर प्रकाशित करते व भेजते रहेगे ।
                                                   
     मै आरती गुप्‍ता उम्र 45 वर्ष ( पटना विहार ) मुक्षे हमेक्षा सीने में र्दद बना रहता था । इसका उपचार हमने कई बडे बडे डॉ0 से कराया , कई प्रकार के टेस्‍ट हुऐ परन्‍तु कोई बीमारी नही निकली , कुछ डॉ0 ने कहॉ कि यह मानसिक तनाव की वजह से होता है । मैने हिदय रोग से लेकर मानसिक बीमारीयों तक का उपचार कराया परन्‍तु  कुछ लाभ नही हुआ ।
  एक दिन मेरे पडौसी ने बतलाया कि नाभी चिकित्‍सा एंव चीनी शॉग उपचार का निशुल्‍क कैम्‍प शहर में लगा है । आप वहॉ जाकर चैक करा ले । मै उस निशुल्‍क चिकित्‍सा कैम्‍प में गयी । पहले उन्‍होने मुक्षे नाभी स्‍पंदन विशेषज्ञ के पास भेजा , उन्‍होने मेरी नाभी का परिक्षण कर सारी बीमारी एंव कब से है मेरे बिना बतलाये सब बतला दिया । उन्‍होने ने बतलाया कि आप की नाभी स्‍पंदन के ऊपर खसक जाने की वजह से आप को हिदय में र्दद बना रहता है , इसी की वजह से कब्‍ज एंव भूख आदि नही लगती । इस उपचार के बाद उन्‍होने मुक्षे ची नी शॉग चिकित्‍सक के पास भेजा उन्‍होने मेरे पेट का परिक्षण कर  पूरी बीमारी बतला दी , मुक्षे अर्श्‍चय हुआ दोनों परिक्षणकर्ताओं ने बिना किसी रिर्पोट या जॉच कराये आसानी से पूरी बीमारी वो भी कब से है बतला दिया उन्‍होने कहॉ आप के पेट व जॉधों पर जो मोटापा है वह भी इसी वजह से है ,इसी की वजह से आप को मानसिक तनाव बना रहता है । सर्वप्रथम नाभी स्‍पंदन जो ऊपर की तरफ खिसक गया था , उसे उन्‍होने ठीक किया पेट पर एक्‍युप्रेशर की तरह से दबाब दिया ,पेट पर आयल मिसाज जैसा कुछ किया ,पेट पर विशेष प्रकार से थपकीयॉ ,तथा अंगुलियों से हल्‍का तो कभी गहरा बायवरेशन जैसे कुछ लगातार किया इससे मेरे पेट पर एक लहरे सी दौडने लगी पेट में हलचल जैसा कुछ महसूस होता रहा दस से पन्‍द्रह मिनट का उपचार दिया गया एंव मुक्षे इस प्रकार उपचार सुबह खाली पेट करने की सलाह दी , इस उपचार को कराने के बाद मै जैसे ही घर आई मुक्षे पतले दस्‍त हुऐ जिसमें काले रंग की लेट्रंग हुई , इसके बाद मुक्षे बडा ही हल्‍कापन महसूस हुआ ,पेट भरा भरा सा लगता था वह नही हुआ ,भूंख अच्‍छी लगी , रात्री में नीद भी अच्‍छी आई , अत: इस उपचार से पहले ही दिन मुक्षे कुछ कुछ फायदे नजर
 आने लगे । जैसाकि उन्‍होन कहॉ था कि मै सुबह खाली पेट अपनी नाभी स्‍पंदन का परिक्षण करू , तो मैने नाभी का परिक्षण किया ,नाभी पुन ऊपर की तरफ थोडी सी खिसकी थी, उनके बतलाये अनुसार मैने हल्‍का हल्‍का मिसाज कर उसे यथास्‍थान ले आई इसके बाद ची नी शॉग मिसाज जैसा उन्‍होन बतलाया था मैने किया । इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में मुक्ष काफी फायदा नजर आने लगा मुक्षे हिद्रय के र्दद में अराम है साथ ही कब्‍ज ,गैस की शिकायत भी दूर हो गयी ,मुक्षे अच्‍छी भूख लगने लगी है । इस उपचार को लेने से मेरा मानसिक तनाव भी कम होने लगा साथ ही एक सबसे बडा लाभ यह हुआ कि मेरे पेट व जॉध पर जो अनावश्‍यक चर्बी बढती जा रही थी जिसकी वजह से पेट काफी बडा होते जा रहा था दुसरा जॉध के मोटापे की बजह से मुक्षे चलने में परेशनी होती थी । इस उपचार से पेट व जॉध की चर्बी धीरे धीरे धटने लगी थी । यह उन्‍होने मुक्षे पहले ही बतला दिया था । उन्‍होने मुक्षे बतलाया कि यह एक प्राकृतिक उपचार है , इससे पेट व उसके आंतरिक अंग मजबुत हो जाते है । यह एक किस्‍म से पेट का व्‍यायाम है , इससे पूरे पेट के अंतरिक अंगों की सर्विसिंग हो जाती है । उन्‍होने माह दो माह में पूरे धर के सदस्‍यों  के नाभी स्‍पंदन एंव ची नी शॉग उपचार लेने की सलाह दी । इससे मेरी बच्‍ची जिसका मोटापा तेजी से बढता जा रहा था परन्‍तु उसकी लम्‍बाई व शरीर के अन्‍य अंगो का विकास नही हो रहा था । इसलिये मैने उसे भी यही उपचार देना प्रारम्‍भ कर दिया , साथ ही मैने जब उसकी नाभी स्‍पंदन का परिक्षण किया तो मुक्षे मालूम हुआ कि उसके नाभी का स्‍पंदन भी मेरी ही तरह से ऊपर की तरुफ खिसक गया था । जिसे मैने यथास्‍थान बैठाल दिया । इस उपचार से मेरी बच्‍ची का कुछ कुछ मोटापा भी कम हुआ  परन्‍तु एक खॉस फायदा यह हुआ कि इससे मेरी बच्‍ची का शारीरिक विकास होने लगा है मुक्षे उम्‍मीद है कि इससे मेरी बच्‍ची को भी पूरा लाभ मिलेगा ।

---अनुभव एंव समाधान कालम ---


                 ---अनुभव एंव समाधान कालम ---
इस कालम के अंर्तगत छात्रों ,मरीजो, तथा पाठकों की समस्‍याओं का समाधान किया जाता है । अत: अनुरोध है कि आप भी अपनी समस्‍याये ,अनुभव,आदि शेयर करना चाहते है तो प्रकाशनार्थ हमारे ईमेल battely2@gmail.com पर भेज सकते है या हमारे ब्‍लार्गस की साईड पर कमेन्‍ट कालम में उक्‍त समस्‍याये, अनुभव, तथा समाधान शेयर किया जा सकता है ।                               
                        
  प्रश्‍न 1- मेरा नाम दिनेश पाठक है मेरी उम्र करीब 55 वर्ष की है,  रतलाम म0प्र0 का निवासी हूं मुक्षे नाभी स्‍पंदन से रोग निदान की जानकारी मिली । मुझे कई बीमारीयॉ कई वषों से थी ।  कई प्रकार के उपचार करा करा कर परेशान हो चुका था इस दरबयान मैने नेट पर नाभी स्‍पंदन से रोगों की पहचान एंव निदान नामक लेख पढा । दा एयुपंचर डब्‍लपमेंन्‍ट एण्‍ड रिसर्च मिशन की जानकारी मुक्षे मिली , मैने नाभी स्‍पंदन चिकित्‍सक की जानकारी चाही, तो उन्‍होने अपने स्‍थानीय चिकित्‍सक का पता दिया उन चिकित्‍सक का नाम डॉ0 के0बी0 सिह था जो मध्‍यप्रदेश सागर में रहते है । मै उनसे मिला एंव अपना उपचार कराया मेरी उन्‍होने नाभी स्‍पंदन का परिक्षण किया एंव पूरी बीमारीयॉ बिना किसी जॉच कराये बतला दी । इसके बाद उन्‍होने मुक्षे बतलाया कि आप का रस एंव रसायन का संयोजन बिगड चुका है , इससे आप को भूंख नही लगती, कब्‍ज रहता है ,गैस बनती है तथा जो भी आप खाते पीते है वह शरीर में नही लग रहा है ,इससे दुर्बलता बढती जा रही है साथ ही झुरूरीयॉ एंव बाल भी समय से पहले झडने लगे है , उन्‍होने नाभी स्‍पंदन को यथास्‍थान ला दिया एंव मुझे समक्षा दिया कि किस प्रकार से नाभी स्‍पंदन का परिक्षण मुंझे स्‍वंय समय समय पर करते रहना है एंव नाभी के खिसक जाने पर उसे अपने स्‍थान पर कैसे लाना है । मैने यह उपचार स्‍वंय कई दिनों तक सुबह खाली पेट किया, मुक्षे कुछ ही दिनों में लाभ समक्ष में आने लगा । इसके अर्श्‍चयजनक परिणामों को देख मैने निर्णय लिया कि मै स्‍ंवय इसका अध्‍ययन करूंगा एंव गरीब निर्धन व्‍यतियों की नि:शुल्‍क सेवा करूंगा । इसलिये इनके द्वारा चलाये जाने वाले निशुल्‍क कोर्स में मैने प्रवेश लेकर इसका अध्‍ययन शुरू कर दिया, जो नि:शुल्‍क कई प्रकार के चिकित्‍सा सम्‍बन्धित कोर्स का संचालन  इमेल के माध्‍यम से पाठय सामग्री भेज कर करती है ।  मैने चीनी शॉग एंव नाभी स्‍पदन से रोग निदान का प्रशिक्षण प्राप्‍त कर, इस चिकित्‍सा की सेवाये दे रहा हूं ।
                                               दिनेश पाठक रतलाम म0प्र0
 समाधान- आप ने ची नी शॉग एंव नाभी स्‍पंदन से रोग निदान का प्रशिक्षण हमारे यहॉ से प्राप्‍त कर मरीजों का निशुल्‍क उपचार कर रहे है इसके लिये हमारा साधुवाद स्‍वीकार हो ।
                                               प्रकाशक

           

                                              
प्रश्‍न 2:- मुक्षे इस बात की खुशी है कि छात्रों की जानकारी व अनुभावों एंव शंका समाधान हेतु अनुभाव एंव समाधान कालम का प्रकाशन किया जा रहा है । नि:शुल्‍क कोर्स जो स्‍थानीय कई समाजसेवीय संस्‍थाओं द्वारा संचालित किये जा रहे है । इससे पहले यह नि:शुल्‍क कोर्स केवल दिल्‍ली द्वारा ही संचालित होते थे , पहले कम्‍प्‍यूटर व नेट आदि की सुविधाये, उपलब्‍ध नही थी , इस लिये दिल्‍ली की प्रमुख संस्‍था ने स्‍थानीय समाज सेवीय संस्‍थाओं के साथ मिलकर सन 2008 में इस नि:शुल्‍क कोर्स का तीन तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन प्रारम्‍भ किया था , जिसमें छात्रों को पाठय सामग्रीयॉ नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराने में बडी असुविधा होती थी, साथ ही संस्‍था को यह व्‍यय स्‍वंय उठाना पडता था । परन्‍तु अब कम्‍प्‍यूटर एंव नेट सुविधाओं की वजह से  छात्रों को मेल एडेस एंव ब्‍लागर साईड से जोडकर विषय सामग्री उन तक उनके मेंल एडेस से भेजना अत्‍यन्‍त सुविधाजनक हो गया है , साथ ही इससे न तो संस्‍था को धन व्‍यय करना होता है । छात्र अपनी सुविधानुसार इस पत्राचार कोर्स का अध्‍ययन घर पर ही कर सकते है एंव जब कभी उन्‍हे सुविधा मिलती है या उनके नगर में या आस पास नि:शुल्‍क प्रशिक्षण कैम्‍प का आयोजन होता है उनमें वह भाग लेकर इसका प्रयौगिग प्रशिक्षण का लाभ उठा सकते है । मैने इस संस्‍था द्वारा संचालित ब्‍युटी क्‍लीनिक ,ची नी शॉग ,होम्‍योपंचर ,एंव नेवल एक्‍युपंचर का पत्राचार कोर्स किया एंव इस संस्‍था में स्‍थानीय समन्‍वयक हूं ।  
                                               सुबोध कान्‍त सिंह पटना बिहार
समाधान- आप ने यह नही बतलाया कि आप किस राज्‍य या नगर के समन्‍वयक है ।  
                                                  प्रकाशक
प्रश्‍न 3- मुक्षे यह जानकार बडी प्रसंन्‍ता हुई है कि आप के द्वारा संचालित नि:शुल्‍क कोर्स में पाठय सामगी , ब्‍लागर साईड एंव आप की अन्‍य साईड पर एक अनुभव व समाधान कालम का प्रकाशन किया जा रहा है ।इस अनुभव कालम में छात्रों एंव मरीजों के उपचार परिणामों को लेख ,फोटोग्राफ, वीडिया के माध्‍यम से प्रकाशित किया जायेगा । इससे छात्रों ,जनसामान्‍य को आप के द्वारा संचालित विभिन्‍न उपचार पद्यतियों की जानकारी के साथ उपचार परिणामों की जानकारी होगी ।
  पूर्व में नि:शुल्‍क कोर्स कई लेखकों के नाम से भी प्रकाशित हुऐ है ,परन्‍तु हिन्‍दी भाषीय क्षेत्र हेतु हिन्‍दी में पाठय सामग्रीयों का प्रकाशन कम ही हुआ है । आप से अनुरोध है कि सर्वश्रेष्‍ट अनुभवों के लेखक , फोटोग्राफ ,एंव वीडियोंग्राफी जो छात्रों हेतु विषयों को समक्षने में सहयोगी हो उन्‍हे प्रोत्‍साहित किया जाये । एंव इस अनुभव कालम में मरीजों व छात्रों की समस्‍याओं का  समाधान भी किया जाये ।                
                                                 डॉ0के0बी0सिंह
समाधान आप के सुक्षाव हमेशा हमारे लिये सहयोगी रहा है । हम आप के सुक्षाओं से सहमत है आप ने सुक्षाव दिया है कि हम इस कालम में अनुभवों के साथ समाधान कालम का भी प्रकाशन करे एंव विषय से सम्‍बन्धित लेखों का प्रकाशन लेखक के नाम से करे । इस सम्‍बन्‍ध में हम कहना चाहेगे कि समाधान हो या विषय से सम्‍बन्धि लेखों के बारे में हो हमने लेखको के नाम्‍ा से ही प्रकाशित किया है आप के भी बहुत से लेख हमने आप के नाम से ही प्रकाशित किया है । हिन्‍दी भाषा में हमे कम लेख प्राप्‍त होते है परन्‍तु जब कभी भी जो भी लेख अपने लेख हमे भेजता है हम उसे उसी के नाम से प्रकाशित करते रहे है और आगे भी ऐसा ही होगा जो छात्र या लेख हमे विषयों से सम्‍बन्धित लेख ,सुक्षाओ ,समाधान ,या अपने अनुभाव हमे भेजेगा उसे हम उसी के नाम से ही प्रकाशित करेगे । अच्‍छे लेख वीडियों ,तथा फोटोग्राफ को प्रोत्‍साहित करेगे एंव वार्षिक परिक्षा में उसके लेखों के मूल्‍याकंन के आधार पर उसे अतरिकत अंक दिये जायेगे साथ ही प्रमाण पत्र भी प्रदाय किया जायेगा ।
                                                      प्रकाशक
 प्रश्‍न 4 - आप के द्वारा अनुभाव एंव समाधान कालम का प्रकाशन किया जा रहा है इसके लिये हमारा साधुवाद स्‍वीकार हो । मै ब्‍यूटी पार्लर चलाती हूं परन्‍तु इसमें आय कम थी परन्‍तु जैसे ही मैने ब्‍यूटी क्‍लीनिक की ब्रांच के कुछ कोर्स जैसे बी गम ,नीशेप ,पिर्यसिंग ,कपिंग,ची नी शॉग उपचार आदि , आप के यहॉ से पत्राचार के माध्‍यम से किया एंव इसकी सुविधाये हमने अपने पार्लस में उपलब्‍ध कराई अब मेरा पार्लर जो पहले धाटे में चल रहा था अब एक लाभ का व्‍यवसाय बन गया है  । मै यह जानना चाहती हूं कि आप के यहॉ से मेल पर जो अध्‍ययन सामग्री भेजी जाती है वह कभी कभी अन्‍य ईमेल एडेस से प्राप्‍त होती है इसी प्रकार ब्‍लागर की जानकारीयॉ भी अन्‍य साईडों से प्राप्‍त हो रही है । कभी कभी फोन आदि करने पर भी जानकारी नही मिल पाती ।
                                           ज्‍योति मौर्या इंदौर म0प्र0
समाधान- आप का प्रश्‍न सही है इसका कारण यह है कि हमारे द्वारा संचालित कोर्स स्‍थानीय समन्‍वयकों द्वारा संचालित होते है । इसलिये हमारे ईमेल से जुडते ही हम उस छात्र की जानकारी, उसका मेल एडेस तथा फार्म आदि स्‍थानीय समन्‍वयक को दे देते है ताकि वह इस कोर्स से सम्‍बन्धित जानकारीयॉ अपने छात्रों को समय समय पर देता रहे दुसरी बात हमारे फोन नम्‍बरों पर चर्चा इसलिये नही की जा सकती क्‍योंकि छात्रों की संख्‍या अधिक है सभी का फोन पर जबाब देना संभव नही है इसीलिये बार बार अनुरोध किया जाता है कि आप केवल हमारे मेल एडस पर ही अपनी समस्‍या भेजे । ब्‍लागर साईड भी हमसे जुडे छात्रों व समन्‍वयों ने अपनी अपनी बनाई है ताकि सम्‍बन्धित विषयों की जानकारी ,लेख, वीडियों ,तथा फोटोग्राफ छात्रों को समय समय पर मिलती रहे ।  
                                                  प्रकाशक
     प्रश्‍न 5 - मै गरिमा बाधवानी उम्र 27 वर्ष लखनउ से एक समस्‍या के समाधान हेतु लिख रही हूं और मुझे पूरी उम्‍मीद है कि आप मेरी समस्‍या को हल करेगे । मै एक कलाकार हूं टी0बी0 सीरियल में भी काम किया है । मैने साउथ व कुछ भोजपूरी फिल्‍मों में भी छोटे मोटे रोल किये है । जैसा कि आप सभी जानते है कि आज कल मांडलिंग का जमाना है और हम नये महिला कलाकारों में सौन्‍द्वर्य ही सब कुछ है ा मै सुन्‍दर हूं मेरी लम्‍बाई भी ठीक है ।परन्‍तु मेरी समस्‍या यह है कि मेरा पेट मर्दो की तरह अधिक चिपका हुआ है । वैसे मै एकहरे बदन की हूं । परन्‍तु न तो अधिक मोटी हूं न ही अधिक दुबली । परन्‍तु मेरा पेट मर्दो की तरह दिखता है मेरी नाभी भी कम गहरी इससे मेरे पेट का आर्कषण महिलाओं की तरह नही है । कई बार इसकी बजह से मुझे फिल्‍मों से निकाला भी गया है । साउथ भोजपुरी फिल्‍मों में गहरी नाभी एंव स्‍त्री की तरह मुलायम पेट का अधिक महत्‍व है । मैने प्‍लास्टिक सर्जरी कराने की सोची है । आप के उपचारों में इस तरह का उपचार है क्‍या   
                                              गरिमा बाधवानी लखनउ उ0प्र0
  समाधान- आप का प्रश्‍न सही है आजकल फिल्‍म ,टेलीवीजन , मॉडलिंग यहॉ तक की सामान्‍य स्‍त्रीयों में गहरी नाभी एंव कोमल उदर क्षेत्र का महत्‍व अत्‍याधिक बढ गया है चूंकि स्‍त्रीय सुलभ आर्कषण में समतल पेट पर गहरी नाभी के होने से कोमलांगनी कही जाने वाली स्‍त्रीयों का सौन्‍र्द्धय कई गुना बढ जाता है मर्दो की तरह से  सक्‍त पेट फिर उस पर किसी जख्‍म की तरह या सकरी कम गहरी नाभी हो तो स्त्रीय सुलभ आर्कषण अपने आप कम हो जाता है एंव स्‍त्रीयों में जो कोमलता का बोध होना चाहिये वह नही होता । पेट को कोमल आर्कषक ,कपिंग उपचार से किया जाता है एंव नाभी को गहरा आर्कषक शेप नी शेप उपचार विधि के नेवेल कार्क को लगा कर किया जाता है । सकरी नाभी को आकार में चौडा करने के लिये नाभी के अन्‍दर नेवल स्प्रिंग लगाई जाती है । आप इसकी जानकारी  इस साईड http://beautyclinict.blogspot.in/
beautyclinic.blogspot.com
neeshep.blogspot.com 
पर नीशेप कलीनिक ,आर्टिक एंव वीडियो देखे आप को इसकी जानकारी हो जायेगी । यदि आप अपना ई मेल एडेस हमे भेजते है तो हम इससे सम्‍बन्धित जानकारी आप को मेल कर सकते है ।                             
                      
                                                       प्रकाशक





           






प्रश्‍न 6 - मै जानना चाहता हूं कि आप के यहॉ कितने प्रकार के नि:शुल्‍क कोर्स का
     संचालन किया जाता है और यह किस प्रकार से होता है । मुक्षे जानकारी
     मिली है कि यह पत्राचार कोर्स है फिर इसका प्रे‍क्‍टीकल नालेज कैसे होगा
     चूंकि आप के कोर्स अधिकाशंत: प्रयौगिक प्रशिक्षण पर निर्भर करता है ।
                                   सुनीता अतुरकर मुम्‍बई
समाधान- आप ने सही कहॉ , हमारे सम्‍पूर्ण कोर्स प्रयौगिक प्रशिक्षणों पर ही  
        निर्भर करते है । इसीलिये हम जो पाठय सामग्री अध्‍ययन हेतु भेजते
        है उसका उद्वेश केवल इतना है कि पहले छात्र सैद्धान्‍तिक विषयों
        का अध्‍ययन धर पर अच्‍छी तरह से कर ले इसके बाद हमारे
        नि:शुल्‍क प्रशिक्षण कैम्‍प जहॉ भी लगते है उसमें प्रयौगिक प्रशिक्षण
       प्रशिक्षणा दिया जाता है चूंकि पहले सैद्धान्‍तिक विषयों के अध्‍ययन से
      छात्र पूरी तरह से तैयार हो जाता है । हमारे द्वारा संचालित निम्‍न
      कोर्स है ।
1-ब्‍युटी क्‍लीनिक- जिसमें सौन्‍र्द्धर्य समस्‍याओं के निदान की तकनीकी सिखलाई जाती है इसकी निम्‍न ब्रांच है बी गम थैरापी ,कपिंग उपचार, पिर्यसिंग , नीशेप उपचार, टैटू , होम्‍युपंचर , ची नी शॉग आदि ।
2- ची नी शॉग उपचार
3- नेवल एक्‍युपंचर
4- एक्‍युपंचर
5-ची नी शॉग
6-नाभी स्‍पंदन से रोगों की पहचान एंव निदान
7-उपतारामण्‍डल परिक्षण द्वारा रोगों की पहचान एंव निदान
8-होम्‍योपंचर
9-इलैक्‍टो होम्‍योपैथिक
उक्‍त कोर्स में प्रवेश लेने हेतु आप हमारे ईमेल  battely2@gmail.com पर आवेदन कर सकते है एंव घर बैठे इस कोर्स का अध्‍ययन कर सकते ,हमारे सम्‍पूर्ण कोर्स पूरी तरह से निशुल्‍क है ।
                                             प्रकाशक








प्रश्‍न 7- मैने सुना है कि आप के यहॉ से ब्‍युटी पार्लर से सम्‍बन्धित एडवासं कोर्स का निशुल्‍क संचालन होता है । क्‍या यह कोर्स पत्राचार से भी किया जा सकता है । इसके करने से क्‍या लाभ है                                       प्रतिसिंह पंजाब

समाधान- आप को मै यह बतलाना चाहूंगा कि ब्‍युटी पार्लर एंव हमारे द्वारा चलाये जाने वाले ब्‍युटी क्‍लीनिक में जमीन आसमान का अन्‍तर है । ब्‍युटी पार्लर में केवल साज श्रृगार का काम होता है । परन्‍तु ब्‍युटी क्‍लीनिक में सौन्‍र्द्धर्य समस्‍याओं का उपचार किया जाता है जैसे एक निश्‍चित उम्र के बाद भी स्‍त्रीयों में स्‍त्रीय सुलभ अंगों का विकास न होना , या अत्‍याधिक मोटापा ,बालों का सफेद होना या झडना , मस्‍से ,मुंहासे, त्‍वचा का रंग बदलना या बदरंग का होना आदि आदि और भी कई प्रकार की समस्‍याये है जिनका चिकित्‍सकीय निदान इस विधि से होता है । ब्‍युटी क्‍लीनिक की कई शाखाये है
  आज के समय में घर घर से लेकर गली चौराहो में ब्‍युटी पार्लर के खुल जाने से इस ब्‍यवसाय में लाभ कम है यह ब्‍यवसाय अब एक धाटे का सौदा बन गया है । परन्‍तु ब्‍युटी क्‍लीनिक के जानकारों का भारत में केवल चार महानगरों को छोड कर बेहद कमी है । इसलिये इसकी जानकारी होते इसका नेटवर्क बिना किसी प्रचार प्रसार के बनने लगता है । जैसे एक उदाहरण हम यहां पर आप को समक्षने के लिये देना चाहेगे । ब्‍युटी पार्लर में अनावश्‍यक बालों को निकालने के लिये बैक्‍स किया जाता है जो काफी र्ददनाक प्रक्रिया है परन्‍तु ब्‍यूटी क्‍लीनिक में बी गम की सहायता से शरीर के अनावश्‍यक बालों को जड़ से बिना र्दद के आसानी से निकाल दिया जाता है । ठीक इसी प्रकार आप सभी जानते है कि हर सम्‍प्रदाय में बच्‍चीयों के नाक कान छिदवाये जाते है और यह काम सोनार की दुकानों में होता आया है । नाक कान को सुनार के द्वारा छेदना एक तो असुरक्षित है फिर संक्रामण का डर बना रहता है धॉव पकते फूटते है, ब्‍युटी क्‍लीनिक की पिर्यसिंग शाखा के अर्न्‍तगत शरीर के किसी भी हिस्‍से में छेद सुरक्षित तरीके से इस प्रकार किया जाता है कि संक्रमण की संभावना नही रहती धॉव भी पकते नही है, इसके साथ इसका सबसे बडा फायदा यह है कि शरीर में छेद इस प्रकार से किया जाता है कि पता ही नही चलता चूंकि वहां की त्‍वचा को पूरी तरह से शुन्‍य कर दिया जाता है । यह तो मात्र दो उदाहरण है, इसी प्रकार के और भी उदाहरण है । यदि बालों को निकालने में या नाक कान या शरीर के अन्‍य हिस्‍सों को छेदने में र्दद नही होगा तो हर ग्राहक आपके पास आयेगा एंव दूसरों को आप की जानकारी देगा इससे आप का नेटवर्क अपने आप बनने लगेगा । आज के फैशनपरास्‍ती युग में युवाओं में टैटू ,एंव पिर्यसिंग कराने का प्रचलन तेजी से बढा है , छोटे शहरों में इसके जानकारों का अभाव होने से ऐसे युवा बडे शहरों की तरफ भागते है फिर इन कामों का परिश्रमिक मुंह मांगा मिलता है । आप इससे सम्‍बन्धित अन्‍य जानकारी हेतु हमारे मेल पर सम्‍पर्क कर सकते है हम पूरी जानकारी आप को आप के मेल पर भेज देगे चूंकि पूरी जानकारी इस समाधान कालम में देना संभव नही है
                                                        प्रकाशक
प्रश्‍न 8- मैने सुना है कि नाभी स्‍पंदन से रोग की पहचान आसानी से की जा सकती है एंव नाभी के स्‍पंदन को यथास्‍थान लाकर बीमारीयों का उपचार किया जाता है । मुझे पेट में र्दद रहता है भूंख नही लगती , गैस बनती है जिससे सीने में र्दद होता है खटटी डकारे भी आती है , मैने एलोपैथिक ,आयुवेदिक ,होम्‍योपैथिक सभी उपचार करा लिया है परन्‍तु कुछ भी लाभ नही हुआ । क्‍या  नाभी स्‍पंदन उपचार से मेरी बीमारी की समस्‍या का हल हो सकता है ।
मुझे नाभी स्‍पंदन चिकित्‍सक का पता भी देने का कष्‍ट करे ।
                                                अल्‍का सुहाने बडोदरा
समाधान- नाभी स्‍पंदन से रोगो की पहचान एंव बीमारीयों का उपचार सफलता पूर्वक किया जा रहा है । इसके आर्श्‍चयजनक परिणम मिले है । आप को हमारी सलाह है कि आप नाभी चिकित्‍सक या ची नी शॉग चिकित्‍सक से अपना उपचार कराये आपको निराशा नही होगी । बडोदरा में डॉ0 मनोज खत्त्री जी दोनो विषयों के अच्‍छे ज्ञाता है ।
                                                   प्रकाशक

प्रश्‍न- नीशेप उपचार क्‍या है नेवल स्‍प्रीग एंव नेवल कार्क क्‍या है । क्‍या इससे नाभी को गहरा आकृषक शेप दिया जा सकता है वो भी बिना किसी नुकसान के । क्‍या मै इस कोर्स को कर सकती हूं इसका प्रेक्‍िटिकल नालेज के लिये मुझे कहॉ जाना होगा ।
                                               अनिता खरे बिलासपुर म0प्र0
समाधान- नीशेप उपचार में नाभी को गहरा आकृषक शेप दिया जाता है । नीशेप में अब पेट को स्‍लीम आकृषक स्‍त्रीय सुलभ बनाया जाने लगा है । इस कोर्स का अध्‍ययन घर बैठे पत्राचार से किया जा सकता है । इसके प्रेक्‍िटिकल नालेज हेतु जब भी कही निशुल्‍क कैम्‍प लगते है उसमें आमंत्रित कर इस का प्रेक्‍िटिकल नालेज आप ले सकती है । कैम्‍प की जानकारी हमारे निशुल्‍क कोर्स में प्रवेश लेने पर समय समय पर बतला दी जाती है । नेवेल स्प्रिंग नाभी के साईज की एक स्‍टीललैस स्‍टील की स्प्रिंग होती है इसे सकरी नाभी को चौडा गोल बनाने के लिये किया जाता है इसे नाभी के अन्‍दर डालकर छोड दिया जाता है जैसे ही स्प्रिंग को नाभी के अन्‍दर दबाव देकर छोडते है इससे स्प्रिंग दबाब के कम होते ही अपने स्‍वाभाविक रूप में आ जाती है । इससे नाभी के अन्‍दर की त्‍वचा पर दबाब डाल कर नाभी को चौडे आकार में गोल बना देती है । नेवेल कार्क नाभी की साईज का कार्क है जिसे नाभी के अन्‍दर डालने से नाभी गहरी गोल हो जाती है । इसकी विस्‍तृत जानकारी हेतु आप अपना ईमेल एडेस भेज हम सम्‍पूर्ण जानकारी आप को मेल कर देगे ।
                                                    प्रकाशक
                                                                                                             
















नाभी सौन्‍द्धर्य पर चर्चा


                          नाभी सौन्‍द्धर्य पर चर्चा
    

  सदियों से महिलाओं की गहरी नाभी आकृषण का केन्‍द्र रही है , वैसे तो महिलाओं की नाभी अकसर गहरी एंव सुन्‍दर होती है , परन्‍तु कुछ महिलाओं की नाभी गहरी आकृषक न होकर उपर की तरफ डण्‍टल की तरह से निकली हुई होती है , जो स्त्री के सम्‍पूर्ण सौन्‍द्धर्य को खत्‍म कर देती है इस प्रकार की नाभी से पेट का आकृषण तो कम हो ही जाता है बल्‍की एक कोमलांगनी स्‍त्रीय के प्रति कोमल भाव भी नष्‍ट हो जाता है । इसी प्रकार से कुछ महिलाओं की नाभी कम गहरी होने के साथ उसमें नाभी धारीयॉ स्‍पष्‍ट रूप से दिखलाई देती है इससे भी नाभी प्रदेश का आकृषण कम हो जाता है । कम गहरी नाभी एंव नाभी पर दिखने वाली धारीयों को नेवल स्प्रिंग से आसानी से छिपाया जा सकता है , जैसे कि पहले नीशेप क्‍लीनिक में इसके बारे में बतलाया गया है । नेवल स्प्रिंग नाभी के आकार की गोल स्‍टीललैस स्‍टील की एक स्प्रिंग होती है जो नाभी के अन्‍दर डाल कर छोड दी जाती है इससे दबाब के कम होते ही स्प्रिंग अपने मूल रूप में आ जाती है एंव इसके दबाब से नाभी धारीयॉ छिप जाती है एंव नाभी पहले की अपेक्षा गोल गहरी सुन्‍दर दिखने लगती है इसका प्रयोग आज कल युवा स्‍त्रीयों में पार्टी या फंगशन आदि में नाभी र्दशना वस्‍त्र पहनते समय किया जा रहा है । नाभी स्प्रिंग को कभी भी लगाया एंव निकाला जा सकता है ।
 दुसरी विधि है नेवेल कार्क से कम गहरी नाभी को गहरा गोल आकृषक बनाना इसमें नाभी की साईज का एक कार्क होता है उसे नाभी पर कुछ दिनों तक लगाने से नाभी कार्क के आकार की गहरी गोल हो जाती है इसका प्रयोंग भी महिलाये आसानी से कर अपनी नाभी को गहरा आकृषक बना सकती है ।नाभी को गहरा करने में नीशेप क्‍लीनिक या नेवल एक्‍युपंचर , तथा अन्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों की मदत ली जा सकती है ।इलैक्‍ट्रोहोम्‍योपैथिक में सी-15 एंव जी ई दवा के नियमित प्रयोग से भी नाभी कुछ दिनों में गहरी आकृषक सुन्‍दर हो जाती है । नेवेल एक्‍युपंचर चिकित्‍सा में नेवल डस्‍ट की शक्तिकृत मात्रा को नाभी के मध्‍य पाईट पर पंचरिग करने से नाभी गहरी होने लगती है ।नाभी को गहरा आकृषक बनाने के विषय में आप इन साईडों पर वीडियों व लेख आदि देख सकते है एंव घर बैठे इस विषय को सीख सकते है यदि आप ब्‍यूटी पार्लर चला रही है तो अपने पार्लर में नी शेप क्‍लीनिक चालू कर अपनी आय को बढा सकती है । आज नी शेप क्‍लीनिक या पार्लर का व्‍यवसाय एक लाभ का व्‍यवसाय बनता जा रहा है । साथ ही गृहणीया अपने बचे हुऐ समय का सदउपयोग कर अपने घर में ही इस नीशेप पार्लर को प्रारम्‍भ कर सकती है ।    xxjeent.blogspot.com neeshep.blogspot.com
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हमारे नि:शुल्‍क ब्‍यूटी क्‍लीनिक प्रशिक्षण में कुछ महिलायें आई थी उनके द्वारा कुछ प्रश्‍न हमारे मेल एडेस पर किये गये जिनकी संकाओं का समाधान किया जा रहा है । आप के भी कुछ प्रश्‍न हो तो आप ऊपर बतलाई साईडों के कमेन्‍ट कालम में अपनी समस्‍याये लिख सकती है आप की हर समस्‍याओं का हमारे एक्‍सपर्ट द्वारा जबाब दिया जायेगा ।
1-रागनी वर्मा सर मेरी उम्र लगभग 24 वर्ष है मेरी समस्‍या यह है कि मेरी नाभी कम गहरी है एंव सकरी तथा पूर्ण रूप से गोलाकार नही है , मेरे पति को गहरी नाभी पसंद है ,इसके लिये मुक्षे क्‍या करना होगा । क्‍या बिना सर्जरी के मेरी नाभी गहरी गोल एंव आकार में कुछ बडी साईज की हो सकती है । मैने कई पत्र पत्रिकाओं में पढा है कि नेवल स्प्रिंग से या कुछ दबाओं से नाभी गहरी हो सकती है ।
उत्‍तर आप ने ठीक पढा है नेवल स्प्रिंग व नेवल कार्क से नाभी को गहरा आकृषक बनाया जा सकता है आप हमारे ऊपर बतलाई साईडों पर नेवल कार्क व स्प्रिंग के ऊपयोग के बारे में जानकारीयॉ हासिल कर इसका प्रयोग स्‍ंवयम घर पर आसानी से कर सकते है । दवाओं में इलै0होम्‍यो0 की दबा व नेवल एक्‍युपंचर के बारे में हम पहल ही लिख आये है । सकरी कम गहरी नाभी के विषय में उपर की साईड में सारी जानकारीयॉ दी गयी है ।
प्रमिला ठक्‍कर सर मेरी उम्र लगभग 25 वर्ष के आस पास है मै एक कलाकार बनना चाहती हूं मै पिछले दिनों एक रियलटी शो में ओडीशन देने गयी थी परन्‍तु जैसे ही उन्‍होने मुक्ष नाभी से नीचे कपडे पहनाया तो मेरी सकरी नाभी की वहज से उन्‍होने मुक्षे निकाल दिया मै बहुत निराश हुई मैने अपनी नाभी को गहरा सुन्‍दर बनवान प्‍लास्टिक सर्जन से चर्चा की तो वह बहुत महगा उपचार बतला रहे है क्‍या नेवेल स्प्रिग व नेवल कार्क या आप की दबाओं से मेरी नाभी स्‍थाई रूप से गहरी आकृषक हो सकती है ।
उत्‍तर आप को मात्र नाभी की वजह से निकाल दिया गया यह जानकर दु:ख हुआ परन्‍तु वास्‍तव में जिस लाईन मे आप गयी है वहॉ सौन्‍द्धर्य ही सब कुछ है । फिर महिलाओं में गहरी गोल नाभी ही आकृषण का केन्‍द्र होती है । आप ने पूछा है कि नेवल स्प्रिंग व नेवल कार्क या हमारी दवाओं से नाभी को स्‍थाई रूप से गहरा गोल सुन्‍दर बनाया जा सकता है तो इसका जबाब है हॉ क्‍यो नही । नेवल स्प्रिग या नेवल कार्क का नाभी पर लम्‍बे समय तक लगे रहने से नाभी स्‍थाई रूप से गहरी एंव गोल आकृषक हो जाती है । इस उपचार से आज लाखों युवा महिलाये लाभान्‍वित हो रही है आप किसी नीशेप पार्लर या नीशेप क्‍लीनिक पर सम्‍पर्क कर इसका लाभ उठा सकती है ।
सविता सेन सर मै एक शादीसुधा महिला हूं मेरी उम्र 45 वर्ष है परन्‍तु मेरी नाभी सकरी कम गहरी है मै इसकी वजह से अन्‍य युवा महिलाओं की तरह नाभी र्दशना वस्‍त्र नही पहन पाती इससे मुक्षे बडी शमिन्‍दगी होती है दुसरा नाभी से ऊपर साडी पहनने से मेरा पेट और बडा दिखता है । अत: मुक्षे कुछ उपाय बतलाये ।
उत्‍तर :- आप से सही प्रश्‍न किया वास्‍तव में नाभी के आस पास का क्षेत्र पहले से ही कुछ मोटा होता है फिर साडी के खोसने से और बडा हो जाता है । इससे स्‍त्रीयों का फिगर पूरी तरह से खराब हो जाता है नाभी से नीचे बस्‍त्र पहनने से ही पेट व कमर पूरी तरह पतले आकृषक दिखते है । परन्‍तु यदि नाभी सकरी कम गहरी या डण्‍टल की तरह से निकली हुई हो तो यह बात सही है कि नाभी से नीचे वस्‍त्र नही पहने जा सकते आप हमारे बतलाई साईड पर जानकारीयॉ प्राप्‍त कर नेवल स्प्रिंग या नेवल कार्क का प्रयोग स्‍वयं घर पर करे एंव हमे इसके प्रयोग व परिणामों से अवगत अवश्‍य कराये ताकि दूसरे आप जैसी महिलाओं को हम आप के लाभ से अवगत करा सके । हमे उम्‍मीद है आप हमारे उत्‍तर से सन्‍तुष्‍ट होगी । नाभी जितनी गहरी होती है उतनी आकृषित दिखती है ऊपर कुछ फोटो डाले है आप उन्‍हे देखिये उसमें नेवल स्प्रिग एंव नेवल कार्क की फोटो है तथा कम गहरी सकरी नाभी की फोटो भी है ।
डॉ0 सिंह का अनुभव केश - पटना बिहार में स्‍थानीय फिल्‍म अभिनेत्री जिसका नाम मै यहॉ पर नही लेना चाहूंगा । उसके फिल्‍म के किसी गाने की शूटींग थी परन्‍तु वह अपनी नाभी को लेकर परेशान थी । उसकी नाभी सकरी एंव उसके अन्‍दर की नाभी धारीयॉ स्‍पष्‍ट रूप से दिख लाई दे रही थी इससे उसके पेट एंव नाभी का आकृषण कम हो गया था । फिल्‍म के डायरेक्‍टर ने उसकी सकरी एंव कम गहरी नाभी की वजह से उस गाने के लिये किसी दूसरी अभिनेत्री को लेने का विचार किया था इससे वह बहुत परेशान थी । चूंकि हमारा ब्‍यूटी क्‍लीनिक का नि:शुल्‍क केम्‍प बिहार के पटना में लगा हुआ था । किसी ने उस अभिनेत्री को हमारे यहॉ चलने वाले कैम्‍प की जानकारी दी । उसने हमसे फोन पर सारी बाते बतलाई एंव घर आने को कहॉ मै और पटना की नीशेप एक्‍सपर्ट श्रीमति कल्‍पना शुक्‍ला दोनो उसके बंगले पर पहूंचे । उसने अपनी सारी स्थिति से बतलाते हुऐ कहॉ कि अभिनेत्रीयों के आकृषण में नाभी का विशेष महत्‍व है मेरी नाभी सकरी एंक कम गहरी तथा नाभी पर स्‍पष्‍ट रूप से धारीयों के दिखने के कारण फिल्‍म डायरेक्‍ट ने किसी दूसरी अभिनेत्री को गाने की शूटीग के लिये लेने पर विचार किया है इससे मै बहुत परेशान हूं । उसने अपनी नाभी हमे दिखलाई उसकी नाभी गोलाई में सकरी थी जिस पर नाभी धारीयों की वजह से वह बहुत ही खराब दिख रही थी साथ ही कुछ नाभीयॉ पूर्ण गोलाकार न हो कर उस पर नाभी के अन्‍दर के अनावश्‍यक मोटी त्‍वचा की परतों की वजह से उसकी गहराई नही दिख रही थी । नाभी की गोलाई कम होने एंव त्‍वचा की परतो की वह से वह ढक चुकी थी फिर उसकी नाभी धारीयॉ की वहज से काले काले निशान उसके आकृषण का कम कर रहे थे । हमने विचार किया कि इसे नेवेल स्प्रिंग से गहरा आकार दिया जा सकता है परन्‍तु हम दोनो ने जो भी नेवल स्प्रिंग हमारे पास उपलब्‍ध थी उसे लगाया परन्‍तु एक भी स्पिंग फिट नही हुई ,हम दोनो ने विचार किया कि चॉदी की पतली तारनुमा पटटी को नाभी की गहराई मे डाल कर फैला दिया जाये तो नाभी का सकरापन एंव उस पर दिखने वाली त्वचा की परतों को आसानी से छिपाया जा सकता है । इसलिये हमने सुनार की दुकान से एक पतली चॉदी की पटटी (तार जैसी) बुलवाई एंव उसे नाभी के आकार एंव गहराई के अनुसार उसे हमने अपने अनुसार ठोक पीट कर बनाया फिर उसकी नाभी की गहराई के अन्‍दर डाल कर प्‍लास से फैला दिया । हमे खुद विश्‍वास नही हुआ कि वह चांदी का तार नाभी के गहरे भाग मे जा कर इस प्रकार से फैल कर सेट हो गया कि दिखलाई तक नही दे रहा था । उसकी नाभी गोल गहरी सुन्‍दर दिखने लगी जब उस अभीनेत्री ने अपनी गहरी नाभी को देखा तो उसे स्‍वय विश्‍वास नही हुआ कि इतनी सुन्‍दर गहरी एंव आकार में गोल नाभी कैसे हो गयी उसने हमसे पूछा भी कि कही ऐसा तो नही होगा कि गाने में हरकत की वहज से नाभी पर लगा तार गिर जाये एंव नाभी पुन: जैसी है वैसी ही हो जाये । हमने कहॉ कि इसे हमने नाभी की गहराई में इस प्रकार से फैला दिया है कि वह त्‍वचा एंव मॉस पर दबाब देते हुऐ फैला है इससे उसके गिरने की कोई संभावना नही है परन्‍तु इसे जब निकालना हो या कोई परेशानी हो तो आप इसे दबा कर प्‍लास से आसानी से निकाल सकते है । अभीनेत्री इस प्रयोग से बहुत खुश थी । उसने बतलाया कि आज ही उसके गाने की शूटीग है एंव इस प्रकार से आप ने बिना किसी चीर फाड किये नाभी को गहरा सुन्‍दर बना दिया मै बहुत खुश हूं आप लोग हमारी शूटिंग पर अवश्‍य आये परन्‍तु चूंकि हमारे नि:शुल्‍क प्रशिक्षण की वजह से हमने आने में अपनी असमर्थता जतलाई । शाम को ही उस अभीनेत्री का फोन आया उसने कहॉ गॉने की शूटिंग अच्‍छे से हो गयी नाभी पर लगाया तार नही गिरा एंव डायरेक्‍टर सहाब भी मेरे गहरी आकृषक नाभी को देख कर प्रशन्‍न थे तथा इस गाने के लिये जिस स्‍थानीय दूसरी अभीनेत्री को लेने का विचार किया था उसे कैंसिल कर दिया गया । हम लोग दुसरे दिन अपने अपने घर चले गये । परन्‍तु दो तीन दिन लगातार उस हीरोईन का फोन आता रहा उसने बतलाया कि तार अभी भी लगा है मैने उसे बतला दिया था कि यह तार कुछ दिनों में नाभी के अन्‍दर जहॉ इसे फॅसाया गया है उसकी चौडई बढने से वह गिर जायेगा । करीब पन्‍द्रह दिनों बाद पुन: फोन आया उसने बतलाया कि तार गिर गया है परन्‍तु नाभी अभी वैसी ही आकृषक दिख रही है हमने कहॉ पुन: इसमें पहले से कुछ अधिक व्‍यास का तार डालना पडेगा इस प्रकार से तार के वृत को बढाते बढाते करीब छै: सात माह के बाद यह स्‍थाई आकार लेगा अभिनेत्री ने पुन: आने का आमंत्रण दिया हमने उसकी नाभी पर लगभग छै: माह तक इसी प्रकार से तार के व्‍यास को बढाते हुऐ नाभी के आकार व वृत को एक निश्चित आकार में एंव गहरा दिखे इसके लिये कपिंग उपचार कि इससे नाभी के आस पास की मॉस के बढ जाने से नाभी अत्‍याधिक गहरी व आकृषक दिखने लगी थी उसकी नाभी में गजब की सुन्‍दरता आ गयी थी हमने नाभी पर नाभी बल बनाने के लिये उसे एक नाडे को बांधने की भी सहाल दी यह नाडा नाभी के मध्‍य से होते हुऐ बॉधा जाता है इससे जहा पर नाडा बॉधते है वहॉ पर नाभी पर एक बल पडने लगता है इससे नाभी और भी अधिक गहरी आकृषक दिखने लगती है उस अभिनेत्री ने आशानुरूप परिणामों से प्रशन्‍न हो कर वैसा ही किया । कुछ दिनों बाद पुन: उसका फोन आया उसने बतलाया कि उसकी नाभी अत्‍याधिक गहरी आकार में गोल तथा नाभी पर बल पडने के कारण और भी सुन्‍दर दिखने लगी है  भोजपुरी फिल्‍मों में अभिनेत्रीयों की नाभी को प्राथमिकता से फिल्‍माया जाता है इसलिये अब उसे कई भोजपुरी फिल्‍मो में जिसमें गहरी सुन्‍दर नाभी को प्राथमिकता दी जाती है मिलने लगी थी ।
संगीता मारू :- सर मै एक टी वी सीरियल में काम करने का प्रयास कर रही हूं वैसे तो मुक्षे एक दो सीरियल में छोटा मोटा काम मिल चुका है परन्‍तु मै इसमें सफल होना चाहती हूं मेरी नाभी वैसे तो गहरी है परन्‍तु नाभी धारीयों एंव उस पर मॉसल्‍स की दरारों की वजह से मेरी नाभी कम गहरी दिखती है मै चाहती हूं यह पूरी तरह से गोल व गहरी दिखे । क्‍यों कि टी वी सीरियल में कई जगह गहरी नाभी को फिल्‍माने के लिये ऐसी अभिनेत्रीयों की तलाश रहती है जिसकी नाभी गहरी एंव गोल आकृषक हो । आप मेरी नाभी की फोटो देख कर बतलाईये कि क्‍या यह नेवेल कार्क या नेवेल स्प्रिंग से पूरी तरह से गोल दिख सकती है ।
उत्‍तर :- आप का प्रश्‍न बहुत ही अच्‍छा है चूकि कई नाभी गहरी तो होती है परन्‍तु उस पर नाभी धारीयॉ जो नाभी के मध्‍य से होती हुई नाभी वृत पर खत्‍म होती है इससे मसल्‍स की दरारों की वहज से नाभी की गहराई छिप जाती है नाभी पूर्ण रूप से गोल नही दिखती यह समस्‍या प्राय: 50 प्रतिशत महिलाओं में होती है । इस फोटो को ध्‍यान से देखिये यह नाभी तो गहरी है परन्‍तु नाभी मसल्‍स जो नीचे की तरफ है नाभी की दोनो दिवारों को ढॅकने के कारण नाभी पूरी तरह से गोल नही दिख रही है इस नाभी को पूर्णरूप से गहरा गोल इसके अन्‍दर नेवल स्प्रिंग को डालकर किया जा सकता है नेवल स्प्रिग को अन्‍दर डालने पर नाभी का आकार पूर्ण गोलाकार हो जाता है नाभी की दरारे व धारीयॉ स्प्रिंग के दवाव से छिप जाती है । नाभी की दरारों व धारीयों की  वजह से उनके नाभी का आकृषण खत्‍म हो जाता है । आप के द्वारा भेजी फोटों को हमने देखा इस प्रकार की नाभी पर जो धारीयॉ या मासल्‍स की दरारे है उसे नेवेल स्प्रिंग से आसानी से छिपाया जा सकता है । जैसा कि पहले भी बतलाया जा चुका है कि नेवेल स्प्रिंग एक साधारण सी स्प्रिंग होती है जिसे नाभी के अन्‍दर डालकर छोड दिया जाता है इससे स्प्रिंग अपने स्‍वाभाविक अवस्‍था में आते ही वह नाभी धारीयों को एंव नाभी के मसल्‍स को छिपा देती है इससे नाभी पूर्ण गोलाकार अवस्‍था में आ जाती है । इसका प्रयोग आप चाहे तो स्‍थाई एंव अस्‍थाई रूप से कर सकती है ।
बबिता खरे :- मेम  नेवेल स्प्रिंग चीर फॉड कर लगाते है क्‍या नेवल स्प्रिंग को लगाने से र्दद होता है । इसे किसी जानकार से लगवाना चाहिये या स्‍वंय भी इसे लगा सकते है ।
उत्‍तर :-आप के प्रश्‍न के उत्‍तर मे मै यह कहना चाहूंगी कि नेवल स्प्रिंग एक साधारण सी स्प्रिंग है इसे दवा कर नाभी के अन्‍दर छोड दिया जाता है जैसा कि स्प्रिंग का स्‍वाभाव है वह नाभी के अन्‍दर जाते ही जब उसे छोडा जाता है वह अपने स्‍वाभाविक स्थिति में आ जाती है इससे उसके दबाओं की वजह से वह नाभी की धारीयों एंव असमान्‍य तरीके से फैली दरारों को दबा कर उसे स्पिंग के आकार की गोल साईज के आकार मे ला देती है इससे नाभी गोल गहरी दिखने लगती है । नेवेल स्प्रिंग को लगाने के लिये किसी भी प्रकार के चीर फॉड की आवश्‍यकता नही है इसे नाभी के अन्‍दर दवाकर छोड दिया जाता है । इसे लगाने पर किसी भी प्रकार का र्दद नही होता इसे आप चाहे तो अपने घर पर ही लगा सकते है एंव जब चाहे आसानी से निकाल सकते है ।  
संगीता माधवानी :- मैडम जी मै लखनऊ से हूं मेरी उम्र करीब करीब 45 वर्ष है लखनऊ मे मेरा एक ब्‍यूटी पार्लर भी है मै पार्लर के साथ अपने क्‍लीनिक में ब्‍यूटी क्‍लीनिक की कुछ सुविधाये अपने ग्राहकों को देना चाहती हूं जैसे टैटू ,पिर्यसिंग, नीशेप क्‍लीनिक आदि  । हमे पता चला है कि आप के यहॉ से नि:शुल्‍क पत्राचार के कोर्स चलते है । अत: हमे इसकी जानकारी देने की कृपा करे ।
उत्‍तर :- हमारे यहॉ जो कोर्स चलते है सभी पूर्णत: नि:शुल्‍क है एंव सारे कोर्स का अध्‍ययन घर बैठे किया जा सकता है , प्रेक्टिकल नालेज हेतु आप के आस पास जहॉ कही भी नि:शुल्‍क प्रशिक्षण कैम्‍प लगते है उसकी सूचना आप को दे दी जाती यह कैम्‍प तीन या चार दिवसीय होता है  इसे अटैन्‍ड कर आप प्रक्टिकल प्रशिक्षण प्राप्‍त कर सकते है । इसकी परिक्षाये व कोर्स सभी मेल से भेजे जाते है । आप अपनी सुविधानुसार इन कोर्स का अध्‍ययन घर पर कर सकते है इसकी कोई फीस नही लगती । हम आप को एक जानकारी और दे दे वह यह है कि यह प्रशिक्षण दा आल्‍टरनेटिव डब्‍लपमेन्‍ट एण्‍ड रिर्सच मिशन के माध्‍यम से चलता है उसकी एक शाखा हमारी है । इसकी पूरी जानकारीयॉ आप को निम्‍न साईड से आप को प्राप्‍त हो जायेगी ।  
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डॉ0 नीलम सिसोदिया छिदवाडा :- सर मै यह जानना चाहती हूं कि नी शेप क्‍लीनिक क्‍या है । आज कल इसकी बडी चर्चा है ।
उत्‍तर :- नी शेप क्‍लीनिक एक किस्‍म का ब्‍यूटी पार्लर जैसा ही है परन्‍तु इसमें मुख्‍य रूप से नाभी को गहरा एंव आकृषक बनाया जाता है । साथ ही पेट को स्‍लीम आकृषक बनाने का कार्य होता है । आज कल महिलाओं में नाभी र्दशना वस्‍त्रों के पहनने के कारण , वे चाहती है कि उनकी नाभी गहरी आकृषक दिखे । जैसाकि हम सभी इस बात को अच्‍छी तरह से जानते है कि सभी महिलाओं की नाभी आकृषक गहरी नही होती । कई महिलाओं की नाभी डण्‍टल की तरह बाहर को निकली होती है तो कुछ महिलाओं की नाभी जख्‍म की तरह से दिखलाई देती है इसी प्रकार कई महिलाओं की नाभी आकार मे छोटी या उस पर नाभी धारीयों के स्‍पष्‍ट दिखने के कारण आकृषक नही दिखती इस प्रकार की नाभी को नीशेप क्‍लीनिक में गहरा गोल आकृषक बनाया जाता है । साथ ही नीशेप क्‍लीनिक में पेट पर बने स्‍ट्रेचमार्क को खत्‍म किया जाता है इसका कोर्स आप घर बैठे सीख सकते है । हमने ऊपर कुछ साईड बतलाई है उस पर आप को सारी जानकारीयॉ असानी से मिल जायेगी ।











                                  डॉ0 जीनत खान नीशेप एक्‍सपर्ट
                                         जबलपुर मध्‍यप्रदेश











रविवार, 3 जून 2018

प्राचीन नाभी चिकित्‍सा


                   
प्राचीन नाभी चिकित्‍सा
  नाभी चिकित्‍सा का उल्‍लेख विश्‍व की कई वैकल्‍पिक चिकित्‍सा पद्धतियों एंव कई परम्‍परागत उपचार विधियों में देखने को मिल जाती है ,परन्‍तु इस सरल सुलभ उपचार विधि के परिणामों से जन समान्‍य अनभिज्ञ है इसका मूल कारण यह है कि इस चिकित्‍सा पद्धति के जानकारो ने इस धन व यश कमाने के लिये अपने तक ही सीमित रखा, उनके बाद यह पद्धति धीरे धीरे उनके साथ लुप्‍त होती गयी । नाभी चिकित्‍सा या उपचार पद्धति के लुप्‍त होने के पीछे आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान का भी बहुत बडा हाथ है, जिन्‍होने इस प्रकृतिक उपचार विधि को अवैज्ञानिक एंव तर्कहीन कह कर, इसकी उपेक्षा ही नही की बल्‍की इसके विकास क्रम को ही अवरूध कर दिया , इसके पीछे मुख्‍य धारा से जुडी चिकित्‍सा पद्धतियों का व्‍यवसायीक दृष्‍टीकोण प्रबल था, जो इस जैसी सरल सुलभ तथा आशानुरूप परिणाम देने वाली उपचार विधि को हासिये में ला खडा कर दिया । चिकित्‍सा जैसा पुनित कार्य  व्‍यवसायीक प्रतिस्‍पृधा के भॅवरजाल में ऐसा फॅसता चला गया कि सस्‍ती सुलभ प्रकृतिक उपचार विधियॉ धीरे धीरे लुप्‍त होती चली गयी । इसीका परिणाम है कि आज नाभी उपचार जैसी सरल सुलभ तथा आशानुरूप परिणाम देने वाली उपचार विधियों से जन सामान्‍य अपरिचित है । विश्‍व के हर कोने में नाभी चिकित्‍सा, उपचार विधि किसी न किसी नामों से अभी भी प्रचलन में है एंव अपने आशानुरूप परिणामों की वजह से एंव मुख्‍य धारा कि चिकित्‍सा पद्धतियों के विरोध के बाबजूद अपना अस्‍तीत्‍व बनाये हुऐ है । नाभी चिकित्‍सा का उल्‍लेख हमारे  प्राचीन आयुर्वेद चिकित्‍सा पद्धति में देखा जा सकता है समुद्रशास्‍त्र एंव ज्‍योतिष विद्याओं में भी नाभी उपचार का उल्‍लेख है । अत: हम कह सकते है कि नाभी चिकित्‍सा हमारे भारतवर्ष की अमूल्‍य घरोहर है , जिसे हम न सम्‍हाल सके , सम्‍हालना तो दूर की बात है हमारा पढा‍ लिखा सभ्‍य समाज इसकी उपेक्षा करते न थकता था, वही बौद्ध भिक्षुओं ने हमारी इस उपचार विधि के महत्‍व को समक्षा एंव इसे अपने साथ चीन व जापान ले गये, जहॉ यह एक नई उपचार विधि, ची नी शॉग के नाम से चीन व जापान मे प्रचलित हुई । एक्‍युपंचर एंव एक्‍युप्रेशर उपचार विधियों के चिकित्‍सकों ने इसे एक नये उपचार विधि के रूप में प्रस्‍तुत किया, अत: कहने का तात्‍पर्य, मात्र इतना है, कि नाभी चिकित्‍सा विश्‍व की वैकल्पिक चिकित्‍सा पद्धतियों में किसी न किसी रूप में प्रयोग की जा रही है एंव इसके बडे ही अच्‍छे आशानुरूप परिणाम मिल रहे है । नाभी चिकित्‍सा के इतिहास को दोहराने की अपेक्षा इसके उपचार महत्‍व पर प्रकाश डालना उचित होगा ताकि जन सामान्‍य इस उपचार विधि का स्‍वयम उपयोग कर इसके परिणामों से परिचित हो सके ।
  जो सरलता से उपलब्‍ध हो जाये , उसका महत्‍व नही होता , परन्‍तु वही काफी मुश्किलों से प्राप्‍त हो तो उसका महत्‍व बढ जाता है । यदि आप से कहॉ जाये कि किसी बीमारी में बिना पैसों के उपचार हो सकता है तो आप को विश्‍वास नही होगा । आप ऐसे बिना खचों के उपचार की बातों में ही नही आयेगे, नाभी उपचार भी इसी प्रकार की चिकित्‍सा है जिसमें बिना किसी खर्च के असाध्‍य से असाध्‍य बीमारीयों का उपचार आसानी से किया जा सकता है यहॉ पर एक छोटा सा उदाहरण, मै देना चाहूंगा ,एक युवा महिला जो हमारे पडौस में रहती थी उसकी नई नई शादी हुई थी वह पेट की बीमारीयों से काफी परेशान थी ,कई जगह उसने अपना उपचार कराया बडे से बडे डॉक्‍टरों को दिखलाया परन्‍तु कुछ भी लाभ न हुआ ,एलोपैथिक से लेकर आयुर्वेदिक ,होम्‍योपैथिक ,यूनानी आदि कई चिकित्‍सकों का उपचार करा चुकी थी उसे किसी प्रकार लाभ नही हो रहा था इस दरबयान उसने मुक्षे भी विभिन्‍न चिकित्‍सकों के उपचार के परचे बतलाये , मैने उसे होम्‍योपैथिक की दबाये लिखी ,परन्‍तु उसने पहले होम्‍योपैथिक से उपचार करा लिया था इसलिये उसने मेरी दवाये न ली । इसी मध्‍य उसकी सासु मॉ उनके यहॉ आई जो नाभी को यथास्‍थान लाना जानती थी उसने अपने लडके से कहॉ अरे तुम जानते थे कि मै पेट सुधारना जानती हूं फिर तुमने मुक्षे क्‍यो नही बतलाया, लडका हॅसा और कहने लगा मॉ ये तुम्‍हारी समक्ष से बाहर है बडे बडे डाक्‍टरो तक की समक्ष में नही आया फिर तुम क्‍या करोगी । उसकी मॉ ने बहुं से कहॉ बेटा तुम इसकी बातों में न आओं । अब मरता क्‍या न करता, बहुं ने सोचा कि इस बिना पैसों के उपचार कराने में हर्ज ही क्‍या है । उसकी सासू मॉ ने पेट का परिक्षण किया उसने बतलाया कि बेटी तुम्‍हारी नाभी टली हुई है उसने उसके पेट का मिसाज कर नाभी को यथास्‍थान बैठाया फिर एक जलता हुआ दिया नाभी पर रख उस पर लोटा रखा । इससे उसकी नाभी यथास्‍थान बैठ गयी उसके पेट का र्दद पूरी तरह से चला गया । कई दिनों बाद जब मेरी पत्‍नी ने उससे उसकी बीमारी के बारे मे पूछा तो उसने बतलाया कि उसकी बीमारी उसी दिन से ठीक हो गयी जब से सासु मॉ ने नाभी को बिठा दिया था । अब आप ही बतलाईये इतने बडे बडे डॉ0 के उपचार से जो ठीक ना हो सकी वह इस छोटे से बिना पैसों के उपचार से पूरी तरह से ठीक हो गयी ।
उपचार :- नाभी चिकित्‍सा में सर्वप्रथम रोगी के नाभी का परिक्षण किया जाता है ,जिस प्रकार से हमारी हाथों की नाडीयॉ चलती (धडकती) है उसी प्रकार से हमारे, नाभी की नाडीयॉ चलती है , नाभी पर तीन अंगुलियॉ रख कर परिक्षण करने पर यदि यह नाडी नाभी के बीचों बीच धडक रही है तो रोगी स्‍वस्‍थ्‍य व दीर्ध जीवी होता है, परन्‍तु यदि यही धडकन ऊपर या नीचे या नाभी वृत के आजू बाजू है तो ऐसी स्थिति में रोगी को वही रोग होगा जिस तरफ नाभी नाडी की धडकन होगी । इस धडकन का अनुमान इस प्रकार किया जाता है, हमारे पेट के अंतरिक अंग जिस तरफ पाये जाते है उसे उसका प्रतिनिध क्षेत्र कहते है । एंव नाभी की धडकन जिस तरफ होती है उसी अंग में बीमारीयॉ होती है , नाभी धारीयों एंव उसकी बनावट से भी रोग की स्थिति को पहचाना जाता है । इसके बाद शरीर की अम्‍लता एंव क्षारीयता का परिक्षण नाभी पर हल्‍दी के पावडर को डालकर या लिटमस पेपर से किया जाता है इस परिक्षण में यदि नाभी गहरी है तो उसकी नाभी पर पानी मे हल्‍दी को घोल कर डालने पर यदि हल्‍दी का रंग लाल हो जाये तो समक्षों अम्‍ल की मात्रा शरीर में अधिक है एंव ऐसी स्थिति में रोगी को अम्‍ल से सम्‍बधित अनेक प्रकार की व्‍याधियॉ हो सकती है यहॉ तक की कैंसर होने की संभावना बढ जाती है यदि इसका रंग नीले रंग का हो जाता है तो समक्षे शरीर रसों में क्षारीयता है क्षारीय होना अच्‍छी बात है एंव व्‍यक्ति के स्‍वस्‍थ्‍यता का सूचक है शरीरिक रसो का क्षारीय होने से कई रोगों का निदान स्‍वयम हो जाता है । आज की जीवन शैली एंव खानपान की वजह से मनुष्‍य के शरीर में अम्‍ल की मात्रा बढ रही है जो बीमारीयों का मूल कारण है इस उपचार विधि में इस अम्‍लीय एंव क्षारीयता रस समायोजन के सूत्र का पालन रोग निदान हेतु किया जाता है ।
नाभी चिकित्‍सा का मूल सिद्धन्‍त है शारीरिक रस रसायनों की समानता एंव नाभी टलने पर उसे यथास्‍थान बैठालना ।

   आज चिकित्‍सा जैसा पुनित कार्य एक व्‍यवसाय बन चुका है, छोटी से छोटी बीमारीयों के उपचार हेतु मुख्‍यधारा से जुडे चिकित्‍सक बडे से बडा परिक्षण लैब टेस्‍ट कराते है हजारो रूपये खर्च होने के बाद दवाये लिखी जाती है या उपचार शुरू होता है । जितनी बडी अस्‍पताल या जितना बडा डॉ0 उतना खर्च । मरीज भी चिकित्‍सा एंव उपचार के भंवरजाल में इस तरह से उलझ जाता है कि उसे भी कुछ समक्ष में नही आता ।
                   नाभी परिक्षण से रोग की पहचान
नाभी चिकित्‍सा पद्धति एक सरल, सुलभ उपचार विधि है , जिस प्रकार  आज मुख्‍यधारों से जुडी चिकित्‍सा पद्धतियॉ या अन्‍य चिकित्‍सा विधियॉ रोग निदान से पूर्व रोग की पहचान करने हेतु कई प्रकार की विधियॉ अपनाती है जैसे पैथालाजी ,एक्‍सरे ,सोनोग्राफी आदि इससे शरीर में कौन सा रोग है यह मालुम हो जाता है । आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्‍सा में नाडी परिक्षण आदि से रोग की पहचान की जाती है, होम्‍योपैथिक उपचार में लक्षणों के आधार पर रोग की स्थिति को पहचान कर उपचार किया जाता है । ठीक इसी प्रकार नाभी चिकित्‍सा में भी उपचार से पूर्व शरीर के किस अंग में खराबी है या कौन सा रोग है पहचाना जाता है  नाभी चिकित्‍सकों का मानना है कि समस्‍त प्रकार की बीमारी पेट से प्रारम्‍भ होती है उनका सिद्धान्‍त है कि रस एंव रसायनों की असमानता से समस्‍त प्रकार के रोग उत्‍पन्‍न होते है !
 1-रस :- प्राणी जीवन का आधार ही रस है, यानी हमारे शरीर में जो भी तरल रूप मे है चाहे वह पाचन क्रिया उत्‍पन्‍न होने वाले रस, विटामिन, एमिनो एसिड, या फिर विभिन्‍न प्रकार के रसायनिक घटक ही क्‍यो न हो, प्रथमावस्‍था में ये सभी रस की श्रेणी में ही आते है, फिर सम्‍बन्धित अंगों के माध्‍यम से रक्‍त व  हार्मोन में परिवर्तित होते है जो रस की , द्वितिय अवस्‍था में रसायनिक घटक में परिवर्तिन होते है ।
2-रसायन :- हम जो कुछ गृहण करते है वह पहले रस में परिवर्तित होता है इसके बाद रसायनिक घटकों में रसायनिक प्रक्रिया द्वारा परिवर्तित होता है, इसे रसायन कहते है । हार्मोन्‍स हो या रक्‍त में मिश्रित सभी प्रकार के तत्‍व रसायनिक प्रक्रिया के माध्‍यम से ही परिवर्तित होते है ।
  अत: नाभी चि‍कित्‍स का मूल सिद्धान्‍त है कि प्राणीयों की समस्‍त प्रकार की बीमारीयॉ रस रसायनों की असमानता की वजह से उत्‍पन्‍न होती है । इस चिकित्‍सा विधि में उपचारकर्ता सर्वप्रथम रस एंव रसायनों को समान्‍यावस्‍था में लाने का प्रयास करता है । उनका मानना है कि रस एंव रसायनों के साम्‍यावस्‍था में आते ही समस्‍त प्रकार की बीमारीयों का निदान बिना किसी दबा दारू के हो जाता है ।
परन्‍तु हमारे शरीर के रस रसायनों के परिवर्तन व प्रतिक्रिया के परिणाम स्‍वरूप जो तत्‍व पसीने आदि के माध्‍यम से शरीर से निकलते रहते है वह नाभी के गहरे भाग में धीरे धीरे जमने लगते है जो मैल की परत के रूप में देखे जा सकते है इसमें एक विशिष्‍ट प्रकार की गंध पाई जाती है यह गंध शरीर के रस रसायनों की विकृति को दृशाती है शरीर में अम्‍लता एंव क्षारीयता को इसकी गंध से आसानी से पहचाना जाता है चूंकि शरीर में रस रसायन के परिवर्तन एंव अम्‍लीयता तथा क्षारीयता के स्‍तर की असमानता से कई प्रकार की बीमारीयों का जन्‍म होता है । अम्‍ल एंव क्षार का पी एच-7 होने पर शारीर का रसायनिक संतुलन सही होता है ,पीएच-7 से अधिक होने पर क्षारीय एंव कम होने पर अम्‍बली होता है  ]
 इसके घटने या बढने पर शरीर क्षारीय या अम्‍बलीय होने लगता है अम्‍ल व क्षार की अधिकता या कमी का परिणाम शारीरिक रसायनिक घटकों में असमानता उत्‍पन्‍न तो करती ही है साथ ही अम्‍बली या क्षारीय माध्‍यमों में होने वाले वैक्‍टरियॉ उत्‍पन्‍न होने लगते है इससे वेक्‍टेरियाजनित बीमारीयों की संभावनाये बढ जाती है । क्षय रोग अम्‍लीय रोग फेफडों के रोग व कैसर जैसी बीमारीयों में शारीर में अम्‍ल का स्‍तर बढ जाता है इससे नाभी मे जो गंध होती है अम्‍बलीय या खटटी ,इसके मैल की परत को निकाल कर उसे साफ पानी में घोलकर लिटमस पेपर पर डालने पर लिटमस पेपर का रंग नीला हो जाता है । क्षार के स्‍तर के अधिक बढने पर  कडुवी सी गंध आती है तथा इसकी परत का परिक्षण करने पर लिटमस पेपर लाल हो जाता है । जानकार नाभी चिकित्‍सक नाभी पर पाये जाने वाले इस मैल का परिक्षण विभिन्‍न विधियों से कर बीमारी का पता आसानी से लगा लेते है ।  जैसे यदि नाभी धारी के मध्‍य पीला रंग है तो उसे पित्‍त से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ या फिर पीलियॉ जैसा रोग होगा , ठीक इसी प्रकार यदि नाभी धारीयों का रंग अत्‍यन्‍त लाल है तो उसे रक्‍त विकार की शिकायत हो सकती है । नाभी धारीयों के मध्‍य सफेद रग का होना वात रोग या नसों से सम्‍बन्धित बीमारीयों का दृशाता है । नाभी में खटटी गंध आने पर रोगी अपच तथा अम्‍ल्‍ा रोग का शिकार होता है ।
 अम्‍ल क्षार  का संतुलन बिगडना :- इस चिकित्‍सा पद्धति का माना है कि शरीर में समस्‍त प्रकार की बीमारीयों का उत्‍पन्‍न होना अम्‍ल क्षार के संतुलन की असमानता है हमारे शरीर में दो तरह के तत्‍व होते है एक अम्‍ल दुसरा क्षारीय । यदि इन दोनो का संतुलन बिगड जाये तो हमारे शरीर मे रोग उत्‍पन्‍न होने लगता है शरीर में अम्‍ल का अधिक होना घातक है    शरीर में अम्‍ल की मात्रा अधिक होने पर कई प्रकार की बीमारीयॉ उत्‍पन्‍न जैसे शरीर में र्दद रहना ,पित्‍त का बढना ,बुखार आना ,चिडचिडाहट , रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम हो जाना ,कैसर जैसी घातक बीमारीयों का मुख्‍य कारण शरीर में अम्‍लीयता का बढना है ।
अम्‍ल :- अम्‍ल (एसिड) को मोटे हिसाब निम्‍न प्रकार से पहचान सकते है ये स्‍वाद में खटटे होते है एंव हल्‍दी से बनी रोली को नीला कर देती है । अधिकाश धातुओं पर अभिक्रिया कर हाईड्रोजन गैस उत्‍पन्‍न करती है तथा क्षार को उदासीन कर देती है ।
क्षार:- क्षार (एलकलाईन) उन पदाथों को कहते है जिनका विलयन चिकना चिकना होता है तथा ये स्‍वाद में कडुवे होते है ,हल्‍दी से बने रोली को लाल कर देते है और अम्‍लों को उदासीन कर देते है । हमारे शरीर में भी दो तरह के तत्‍व होते है अम्‍ल हाईडोजन आयन को शरीर में बढादेता है क्षारीय भोजन हाइडोजन आयन को कम कर देता है जो शरीर के लिये लाभदायक है ।
पी एच-7 :-  अम्ल एवं क्षार की मात्रा को नापने के लिए एक पैमाना तय किया है जिसे पीएच कहते हैं । किसी पदार्थ मंे अम्ल या क्षार के स्तर को की मानक ईकाइ पीएच है । पीएच को मान 7 से अधिक अर्थात वस्तु क्षारीय है । शुद्ध पानी का पीएच 7 होता है । पीएच बराबर होने पर पाचन व अन्य क्रियाएं सुचारू रूप से होती है । तभी हमारे शरीर की उपापचय क्रिया सही होती है एवं हारमोन्स सही कार्य कर पाते हैं एवं उनका सही स्त्राव होता है । तभी शरीर की प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है ।
बढ़ता प्रदूषण, रसायनों का सेवन व तनाव से शरीर में अम्लता की मात्रा बढ़ती है । तभी आजकल रक्त मे पीएच 7.4 से कम हो गया है । 7.4 आदर्श पीएच माना जाता है । इससे उपर पीएच का बढ़ना क्षारीय व इसका 7.4 से कम होना एसीडीक होना बताता है। आजकल हमारा रक्त का पीएच 6 या 6.5 रहता है । इसी से कैंसर जैसी घातक बीमारियां होती है । शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई है । शरीर में दर्द इसी से रहता है । पित्त का बढ़ना, बुखार आना, चिढ़ना सब अम्लता बढ़ने से होता है ।
निम्बू, अंगुर आदि फल खट्टे होते हैं लेकिन पाचन पर ये क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं । इनके अन्तर स्वभाव से नही बल्कि पचने पर जो प्रभाव होता है उसके
 कारण क्षारीय माना जाता है । पाचन पर जो खनिज तत्व बनाते हैं व सब क्षारीय होते हैं ।
अम्लीय आहार – मनुष्य द्वारा निर्मित आहार प्रायः अम्लीय होता है जिससे एसीडिटी होती है । जैसे तले-भूने पदार्थ, दाल, चावल, कचैरी, सेव, नमकीन, चाय, काॅफी, शराब, तंबाकु, डेयरी उत्पाद, प्रसंस्कृत भोजन, मांस, चीनी, मिठाईयां, नमक, चासनी युक्त फल, गर्म दूध आदि के सेवन से अम्लता बढ़ती है ।
क्षारीय आहार  प्रकृति द्वारा प्रदत आहार (अपक्वाहार) प्रायः क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं । जैसे ताजे फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज, पानी में भीगे किशमिश, अंजीर, धारोष्ण दूध, फलियां, छाछ, नारियल, खजूर तरकारी, सुखे मेवे, आदि पाचन पर क्षारीय हैं ।ज्वारे का रस क्षारीय होता है । यह हमारे शरीर को एल्कलाइन बनाता है । शरीर के द्रव्यों को क्षारीय बनाता है । खाने का सोड़ा क्षारीय बनाता है ।
बीमारीयों की पहचान:- नाभी चिकित्‍सा में बीमारीयों को पहचानने की कई विधियॉ प्रचलन में है परन्‍तु मुख्‍य रूप से निम्‍न परिक्षण मूल रूप से किये जाते है । 
1- स्‍पर्श परिक्षण :- इस में मरीज के शरीर का स्‍पर्श परिक्षण किया जाता है जिससे शरीर का तापक्रम मालुम होता है , नाडी परिक्षण , दृष्टि परिक्षण मरीज को देखकर ,ऑखों का परिक्षण , जीभ तथा मल मूत्र का परिक्षण जो सामान्‍यत: उनके रंग गंध आदि से पहचाना जाता है । 
2- नाभी परिक्षण :- नाभी चिकित्‍सा में रोग को पहचान ने के लिये मूल परिक्षण है, नाभी परिक्षण, चूंकि नाभि चिकित्‍सकों का मानना है कि मनुष्‍य के समस्‍त प्रकार के रोगों का परिक्षण मात्र नाभी की बनावट उसकी धारीयों एंव नाभी स्‍पंदन से आसानी से पहचाना जा सकता है ।
नाभी चिकित्‍सा में सर्वप्रथम नाभी की बनावट उसके आकार प्रकार  एंव उसकी स्थिति से रोग की पहचान की जाती है ।
3-अम्‍ल क्षार परिक्षण :- इस परिक्षण से यह ज्ञात हो जाता है कि रोगी के शरीर में अम्‍ल व क्षारीयता की क्‍या स्थिति है जो रोग का मूल कारण है । यह परिक्षण उन रोगीयों पर ही किया जा सकता है जिसकी नाभी गहरी होती है एंव उसके अन्‍दर मैल की परत हो तथा उसमें से गंध आती हो । इसका मूल कारण यह है कि हमारे शरीर से निकलने वाले पसीन से शरीर के वे तत्‍व रस या रसायन की मात्राये निरंतर निकलती रहती है चूंकि शरीर में नाभी मात्र एक ऐसा अंग है जहॉ पर पसीना असानी से रूक जाता है एंव सूखने पर वह मैल की परत के रूप में शरीर से चिपका रहता है ,शरीर के तापक्रम एंव निरंतर सम्‍पर्क की वहज से जो तत्‍व शरीर से निकलते रहते है वह उचित परिणाम में सुरक्षित रहते है इससे कभी कभी नाभी में वैक्‍टेरिया भी पलने लगते है ये वेक्‍टेरिया शरीर को किसी भी प्रकार का नुकसान नही पहूचाते बल्‍की शरीर की सुरक्षा करते है इस मैल से एंव वैक्‍टेरिया से शरीर की अम्‍ल एंव क्षारीयता की स्‍थिति का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है जैसे गंध से यदि गंध खटटी है तो अम्‍ल एंव यदि गंध कडुवी या कसैली है तो क्षारीय ।
लिटमस या हल्‍दी परिक्षण :- गहरी नाभी के मरीज की अम्‍ल क्षारीयता का पता लगाने के लिये उसकी नाभी पर पहले शुद्ध पानी डाले फिर उसके अंदर के मैल को किसी साफ वस्‍तु से इस प्रकार धोले ता‍कि अन्‍दर के मैल की परत उसमे अच्‍छी तरह से धुल जाये इसके बाद उसके अन्‍दर हल्‍दी से बनी रोली डाल दे यदि वह लाल हो जाये तो समक्षे शरीर क्षारीय है एंव यदि वह पीली हो जाये तो समक्षे शरीर में अम्‍ल की मात्रा बढ रही है जो घातक है ।
हल्‍दी की रोली की जगह आप चाहे तो लिटमस पेपर को डाल कर भी यह परिक्षण आसानी से कर सकते है ।
पर हल्‍दी शरीर से निकलने वाले इस तत्‍व में अम्‍ल व क्षार यह सूखा हुआ को कर
(अ):- नाभी की स्थिति :-यदि नाभी की स्थिति शरीर के मध्‍य में है तो ऐसा व्‍यक्ति निरोगी होता है । यदि नाभी मध्‍य में न होकर कुछ नीचे को है तो ऐसे व्‍यक्तियों को पेट के नीचे पाये जाने वाले अंगों से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ अधिक होती है । ऊपर की तरुफ है तो उसे पेट के उपर पाये जाने वाले अंगों से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ होती है ।
यदि नाभी की स्थिति बिलकुल मध्‍य में न होकर दायी तरुफ होती है तो ऐसे मरीजो को पेट पर पाये जाने वाले दॉये अंग से सम्‍बन्धित रोग हो सकता है ठीक इसी प्रकार यदि बॉये तरुफ है तो बॉये अंग से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ हो सकती है ।
उपरोक्‍त स्थिति का अध्‍ययन पेट पर पाये जाने वाले वृत के अध्‍ययन से किया जा सकता है का आकार
(ब) नाभी की बनावट :-हर व्‍यक्तियों की नाभी की बनावट अलग अलग होती है यहॉ तक की जुडवा संतानों के शरीर की बनावट भले एक सी हो परन्‍तु उनके नाभी का आकार प्रकार व बनावट अलग अलग होगी ,ठीक उसी प्रकार से जैसे हाथों की रेखाये हर व्‍यक्तियों की अलग अलग होती है । नाभी के आकार प्रकार एंव बनावट से नाभी चिकित्‍सक रोग की पहचान करते है ।
यदि नाभी ऊपर को डण्‍टल की तरह से उठी हुई है तो ऐसे व्‍यक्तियों को गैसे अपच आदि की शिकायत हो सकती है । अन्‍दर को धॅसी हुई गहरी नाभी इस प्रकार के रोगी को स्‍वस्‍थ्‍य माना जाता है परन्‍त उक्‍त दोना बनावट के साथ अन्‍य स्थितियों जैसे धारीयों की बनावट एंव नाभी के आकार को भी आधार माना जाता है ।
(स)नाभी धारीयॉ या रेखा:- इसमें नाभी धारीयॉ एंव नाभी बनावट मुख्‍य रूप से है जैसे नाभी की बनावट में यदि नाभी का आकार जिस ओर होता है उस तरुफ के अंग रोगग्रस्‍त होते है इसी प्रकार नाभी धारीयॉ की स्थिति का भी पता लगाया जाता है जैसे नाभी धारी या जिसे नाभी रेखा भी कहते है । यदि नाभी धारी की बनावट या स्थिति जिस ओर इसारा करती है उसी तरुफ के अंगों से सम्‍बन्धित रोग होता है । यह बडी ही सरल विधि है । परन्‍तु इसे बारीकी से समक्षना चाहिये तभी रोग का परिक्षण का परिणाम उचित होगा । इस परिक्षण हेतु नाभी वृत परिक्षण चार्ट को देखिये ।
(द) नाभी धारीयों का रंग :- नाभी धारीयों के मध्‍य रंग व गंध पाई जाती है , दक्ष नाभी चिकित्‍सा रोगों की पहचान नाभी धारीयों के रंग व गंध से आसानी से कर लेता था । नाभी के अन्‍दर से गंध का रोग पहचान में बडा महत्‍व है चूंकि जैसा कि आप सभी इस बात को अच्‍छी तरह से जानते है कि नाभी ही एक ऐसा अंग है जिसमें शरीर से निकलने वाला पसीना या व्‍यर्थ पदार्थ आसानी से कई कई दिनों तक छिपे रहते है यहॉ तक की कई व्‍यक्तियों की नाभी में जो पदार्थ छिपे रहते है वह उनके जन्‍म के समय से ही छिपे रहते है फिर शरीर के तापमान आदि की वहज से उसमें ऐसे वेक्‍टेरिया पनपने लगते है जो शरीर के रक्षक होते है इन वेक्‍टेरिया से शरीर को नुकसान नही होता ।
                              
      नाभी की बनावट हिलमोजी साईस
   Helum हिलम याने गढठा या छिद्र इसे hilus भी कहते है ।
 Ridge रिजिस रिजिस या धारीयॉ जो शरीर में प्राय: हाथ पैरों पर पाई जाती है परन्‍तु यह शरीर के अन्‍य भागों में भी पाई जाती है । जिस प्रकार किसी भी मनुष्‍य के हाथ की धारीयॉ एक दूसरे से नही मिलती ठीक उसी प्रकार नाभी धारीयॉ भी किसी भी व्‍यक्यों में एक सी नही होती ।
 Helix हिलेक्‍स इसकी बनावट पेचदार या धुमती हुई आकृति की होती है । Apex शीर्ष अपेक्‍स की बनावट नोक के समान या शीर्ष की तरह से उठी हुई होती है । इस तरह की नाभी  डण्‍टल की तरह ऊपर को निकली हुई होती है
Umbo गाठ यह प्राय: गाठों की तरह की अकृति की होती है । इस प्रकार की नाभी गहरी न हो कर उपर निकली हुई गाठ की तरह से दिखती है 
Nodeगाठ यह भी  Umbo की तरह फूला हुआ भाग होता है ।
Arch धूमती हुई आकृति शरीर का कोई भी गाठ या छेद्र प्राय: जो धुमाव लिये हुऐ आकृति का होता है उसे आर्च कहते है ।
Deep डीप या गहराई ऐसी नाभी जो किसी गडडे की तरह से गहरी होती है उसे डीप या गहरी नाभी कहते है ।
आई शेप( ऑखों की आकृति ):- इस प्रकार की नाभी अधिक गहरी नही होती परन्‍तु इसकी आकृति को ध्‍यान से देखने पर ऐसा लगता है जैसे ऑखों का आकार हो । इस प्रकार ऑखों की अकृति वाली नाभी भी दो प्रकार की होती है । एक में ऑखों के आकार के अन्‍दर धारीयॉ स्‍पष्‍ट रूप से दिखलाई देती है तो दूसरे प्रकार की नाभी में धारीयॉ नही दिखती इस प्रकार की नाभी गहरी होती है ।